3 नवंबर 2026खबरें • विश्लेषण • जनसरोकार

मध्यप्रदेश की आवाज़
जनसरोकार की पत्रकारिता

भोपाल : प्रदेश में फिर हुई पानी की कमी हैण्डपम्प तक सूखे 

कहा गई वो सरकार की योजनाए जहा वे घर घर पानी पंहुचा रहे थे ?

भोपाल : प्रदेश में फिर हुई पानी की कमी हैण्डपम्प तक सूखे 

  • कहा गई वो सरकार की योजनाए जहा वे घर घर पानी पंहुचा रहे थे ?

भोपाल/निकिता सिंह :  मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। कई जिलों में तो पेयजल संकट में आ गया है। हेंडपम्प चलाने पर वह हवा दे रहे हैं। जल स्त्रोत भी जवाब दे चुके हैं। परेशानी में लोग दूर-दूर से पेयजल की सुविधा कर रहे हैं। पीने के पानी के लिए लोगों को दूर तक पैदल जाना पड़ रहा है।  और वहां से पानी लाना पड़ रहा हैं। जिसके कारण लोगों की दिनचर्या में काफी प्रभाव पड़ रहा है।

नितेश ओझा के अनुसार पानी भरे से भरे ड्रम रखकर हाथ ठेला को धक्का देते हुए पानी ले जाते है। नितेश का कहना है कि मोहल्ले में पेयजल की लाइन है लेकिन पानी नहीं आता दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है।

इन जगहों में हो रही है पानी की कमी- (मंडला ,सीहोर, ग्वालियर ,विदिशा, श्योपर, दतिय, अशोकनगर ) ।

  • अशोकनगर – अशोकनगर में तुलसी सरोवर के पास आदिवासी बस्ती में जमीन से खोदि झिरिया  से पानी निकालती महिलाएं देखी गई है।
  • मंडला- आपको बता दें कि सरकार ने नल जल  योजना  चलाई थी मंडला जिले के 611 नल जल योजना में से 84 बंद है। और 16 योजनाएं मैं से मैनेजर ना होने के कारण या बिजली का बिल न जमा करने के कारण बंद कर दी जाती है।
  • सीहोर- सीहोर जिले के 150 गांव में मार्च से ही भीषण जल संकट के हालात दिखाई दिए। जल स्तर गिरने से हैण्डपम्प ट्यूबवेल ने भी दम तोड़ दिया है।  और वही कुछ हैण्डपम्प रुक रुक कर पानी देते हैं।
  • पिएचई अफसरों का कहना है कि 45  राइजन 120 मोटर का स्टॉक कर लिया है 110 बोर खनन कराने की योजनाएं बनाई गई है।
  • ग्वालियर- सूत्रों के अनुसार जिले के चारों जनपद पंचायतों ने जल संरक्षण के लिए र करोडो रुपए खर्च कर दिए  1135 छोटी जल संरचनाएं और 115 छोटे-बड़े स्टॉप डैम बने हैं वही ग्राम पंचायत में 183 नल जल योजनाएं बनाने का दावा किया जा रहा है। इतने में से केवल 25 पेयजल सप्लाई हो रही है।
  • विदिशा- विदिशा में करीबन 10 हजार 900 हैडपम्प  हैं जिनमें से 300 हैण्डपम्प बंद हैं।
  • श्योपुर-  श्योपुर  जिले में 5-10 साल पहले औसत भूजल स्तर पर 40 से 50 मीटर था। जो अब औसत 70 मीटर तक पहुंच गया है। 
  • दतिया- दतिया शहर में 1 दिन छोड़कर पेजल आता है शिवपुरी शहर के अधिकतर हिस्सों में जल संकट है। कुछ जगहों पर तो मणिखेड़ा डैम से पानी की सप्लाई की जा रही हैं।
लेखक के बारे में

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। ज़रूरी खानों पर * चिह्न है।