तो क्या मुख्यमंत्री शिवराज मान लेंगे BJP MP केपी यादव की ये मांग? लिखा पत्र

गुना : राजस्थान और महाराष्ट्र के बाद अब मध्य प्रदेश में भी पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग तेज होती जा रही है। दरअसल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। सीएम गहलोत के ऐलान के बाद से ही मध्यप्रदेश में भी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।
इस मामलें में जहां कर्मचारियों-अधिकारियों को कांग्रेस के साथ का भरपूर साथ मिल रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ अब भाजपा के नेताओं ने भी इसे दोबारा लागू करने की बात कही है। कई भाजपा नेताओं ने इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र भी लिखा है। बता दे कि अब गुना से भाजपा सांसद केपी यादव भी इसके समर्थन में आ गए है। उन्होंने भी मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र लिखकर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि सांसद केपी यादव ने 26 फरवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। केपी ने अपने पत्र में लिखा है कि “प्रदेश के अधिकारी/कर्मचारियों की लंबित मांगों में से प्रमुख मांग पुरानी पेंशन बहाली है। राजस्थान सहित कई राज्यों ने भी पेंशन योजना को फिर से लागू कर दिया है, जिससे प्रदेश के कर्मचारियों में उत्सुकता का माहौल बना गया है। इसलिए इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक निर्णय लिया जाना समसामयिक हो गया है। अनुरोध है कि कर्मचारी/अधिकारियों की जायज मांग पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए।
गौरतलब है कि लंबे समय से मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर मांग उठाई जा रही है। 286000 शिक्षक, डेढ़ लाख संविदाकर्मी और 48000 स्थाईकर्मी कई बार अंशदायी पेंशन की जगह पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर चुके है। अंशदायी पेंशन में 10% कर्मचारियों की सैलरी से काटा जाता है और 14% सरकार मिलाती है और फिर कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर 50% का भुगतान एकमुश्त कर दिया जाता है और शेष राशि से 3-4 हजार पेंशन के रूप में दी जाती है। यही कारण है कि कर्मचारियों द्वारा पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकी इस राशि में इजाफा हो सके।




