बेरोजगारी से बढ़ रहे आत्महत्या के मामले, लेकिन नहीं खुल रही शिवराज सरकार की नींद, चयनितों को नहीं मिली अभी तक नियुक्तियां

- राजधानी में बेरोजगारी से परेशान युवा कर रहे आत्महत्या
- आर्थिक स्थिति के चलते परिवार पालना हो रहा मुश्किल
भोपाल/निशा चौकसे:- मध्यप्रदेश में बेरोजगारी के चलते युवा परेशान है और इससे लगातार आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं और कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल लगाए गए लॉकडाउन और इस साल कोरोना कर्फ्यू ने आम आदमी की जिंदगी पर गहरा असर डाला है. कई लोगों के काम धंधे ठप हो गए हैं तो कई लोगों की नौकरियां चली गई जिससे बेरोजगारी ने प्रदेश में अपना ठेका जमा लिया है. सरकार भी केवल रोजगार को लेकर बड़ी-बड़ी घोषणाए करती है लेकिन उन घोषणाओं पर अमल नहीं होता. चयनित शिक्षकों की नियुक्ति अभी भी अधर में है, सरकार द्वारा जितने भी सोमवार दिए गए अब वो सोमवार भी बीत चुके हैं. सरकार सिर्फ आश्वासन देने का काम कर रही है.
बेरोजगारी से आत्महत्या के आकड़े
बेरोजगारी के चलते हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों की जमा पूंजी तो खत्म हो ही गई है, साथ ही भोजन पानी, परिवार पालने और बच्चों की फीस तक का संकट पैदा हो गया है, ऐसे में लोग गलत कदम उठा रहे हैं राजधानी में यह रोजाना एक से ज्यादा खुदकुशी के मामले सामने आ रहे हैं. आंकड़ों की बात करें तो सितंबर महीने में 26 दिनों में ही राजधानी में आत्महत्या के 29 मामले सामने आ चुके हैं वहीं जनवरी से लेकर अब तक 9 महीने की बात करें तो राजधानी में 332 लोग अलग-अलग कारणों से आत्महत्या कर चुके हैं. जून और जुलाई में जब कोरोना की सेकंड वेव चल रही थी उस समय तो खुदकुशी के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. इस विषय में मनोचिकित्सकों के अनुसार बेरोजगारी के चलते लोग डिप्रेशन का शिकार हुए ओर लोगों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए हैं.
जीतू पटवारी ने सरकार का किया घेराव
बढ़ती बेरोजगारी को लेकर जीतू पटवारी ने ट्वीट कर शिवराज सरकार को घेरते हुए कहा कि बेरोजगारी से परिवार बर्बाद हो रहे हैं लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री का व्यापर जारी है. साथ ही उन्होंने कहा कि महामारी और महंगाई से बदहाल प्रदेश बीजेपी सरकार की करतूतों से बर्बाद होता नजर आ रहा है.




