बड़वानी : एड़िया बाबा को मिला "अपना घर"

बड़वानी : एड़िया बाबा को मिला "अपना घर"


बड़वानी, हेमंत नाग्झिरिया 

कहते हैं कि जब तक किसी कार्य का योग नहीं होता है तब तक कार्य के पूर्ण होने पर संशय बना रहता है, किंतु सही दिशा में निस्वार्थ भाव से प्रयास किए जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। वर्षों से ग्राम लोनसरा फाटे पर बने यात्री प्रतीक्षालय में निवासरत वृद्ध एड़िया बाबा कभी भी अपने स्थान को छोड़ना नहीं चाहता था। क्योंकि उसी ग्राम का मूल निवासी होना उसे ग्राम के लोगों से भावनात्मक रूप से जोड़ें हुए था तथा राहगीरों के द्वारा दी जा रही भोजन सामग्री आदि के कारण वह अपना स्थान असुरक्षित होने पर भी नहीं छोड़ रहा था। कई बार उसे आशा ग्राम में संचालित वृद्धा आश्रम ‘‘ अपना घर ‘‘ पहुंचाने के प्रयास हुए, किंतु वह कभी तैयार नहीं हुए। कोविड-19 कोरोनावायरस के कारण जिले में लॉक डाउन होने से आमजन का आवागमन बंद हो गया। इस पर जब एडिया बाबा को असुविधा होने लगी तो ऐसे में ग्राम के लचेटा परिवार द्वारा उसे नियमित भोजन दिया जाने लगा। 

इस दौरान अनुविभागीय अधिकारी सुश्री अंशु जावला के द्वारा इस वृद्ध का संज्ञान लेकर सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग में बुजुर्ग के पुनर्वास के विषय में विभाग के श्री मनोज राऊत को निर्देशित किया ,वही संयुक्त कलेक्टर सुश्री जानकी यादव ने भी आशा ग्राम ट्रस्ट के पीआरओ श्री सचिन दुबे को उक्त वृद्ध को आशा ग्राम में लाने के लिए कहा , जिस पर श्री दुबे ने सामाजिक न्याय विभाग से समन्वय कर ग्राम के जीआरएस श्री  शैलेंद्र गोयल एवं पीएलवी श्री सरदार बघेल को सतत प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। अंततः वृद्ध सभी लोगों के प्रयास से मान गया तथा खुशी- खुशी ग्राम के ही सर्व श्री शोभाराम गोयल, रंजीत गोयल, शैलेंद्र गोयल के  सहयोग से अपना घर वृद्ध आश्रम आशा ग्राम  पहुंचाया गया। जहां वृद्ध का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे सैनिटाइज किया गया । अब वृद्ध यहां के खुली आबोहवा में एवं अपने ही जैसे रह रहे लोगों का साथ पाकर जहां खुश है वही भविष्य के प्रति भी आशान्वित हो गया है।