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सिहोरा : नहरों में छोड़ा जा रहा माइंस का गंदा पानी, जमी खनिज पदार्थों की 3 से 4 इंच मोटी परत

सिहोरा : नहरों में छोड़ा जा रहा माइंस का गंदा पानी, जमी खनिज पदार्थों की 3 से 4 इंच मोटी परत

  • गांधीग्राम की कुंड वितरिका में ब्लू डस्ट मैंगनीज और आयरन ओर की परतें जमी
  • नहर और राजस्व विभाग से शिकायत के बाद नहीं हो रही कोई कार्यवाई
  • माइंस  संचालकों की मनमानी नहीं रुक रही मनमानी

 द लोकनीति डेस्क सिहोरा 
अधिकारियों की उदासीनता व माइंस मालिकों की  मनमानी के चलते नहरों में रात्रि के समय माइसों का ब्लूडस्ट, आयरन ओर, मेगनीज आदि मिला हुआ रसायन युक्त पानी नहरों में बहाया जाना बदस्तूर जारी है। नहर में जम जाती है मिश्रित खनिजों की परत-माइसों से जब दिन के समय पानी बीच बीच में बन्द किया जाता है तो नहर में आयरन ओर, ब्लूडस्ट, मैगनीज आदि मिश्रित खनिजों की तीन से चार इंच मोटी परत जम जाती है।
विभागों का उदासीन रवैया
लगभग 15 दिवसों से अधिक समय बीतने के बाद भी रात्रि के समय व दिन में भी माइसों से पानी को छोड़ा जा रहा है किंतु इस ओर नहर विभाग ने आँखों मे पट्टी बांध ली है, किसानों का कहना है कि जल उपभोक्ता संस्थाएं व उनके पदाधिकारी भी नहरों की सुरक्षा के प्रति जवाब देह नही है और न ही इस ओर ध्यान  देती,किसानों ने कहा कि संस्थाओं द्वारा शिकायत प्रशासन से न किये जाने का नतीजा यह है कि माइंस मालिकों के हौसले बुलंद हैं,और खनिजयुक्त पानी नहरों में बहाया जाना अभी तक नहीं रुका है।


चोरी छिपे रात्रि व सुबह के समय छोड़ने हैं रासायनिक पानी 
 वर्तमान में नर्मदा घाटी बरगी नहर व्याप वर्तन परियोजना के जल उपभोक्ता संस्था गांधीग्राम की कुंड वितरिका पिपरिया नहर में धमकी व बम्होरी क्षेत्र की माइंस व प्लांटों से ब्लूडस्ट, मेगनीज,लेटराइट, आयरनओर व मिट्टी युक्त पानी चोरी छिपे रात्रि व सुबह के समय छोड़ा जा रहा है।अव्यवस्थाओं के चलते खनिजयुक्त पानी के नुकसान से अनजान किसानों की फसल बर्बाद हो सकती है परंतु विभाग को यह सब जांचने व फील्ड पर निकलने की फुर्सत नहीं है।
खनिजयुक्त पानी की सप्लाई नहर में किये जाने से  किसानों द्वारा विभाग के प्रति नाराजगी जताई जा रही है।
इस प्रकार के नुकसान की आशंका
 वर्तमान समय में नहर में जो खनिज युक्त पानी बह रहा है उस पानी को कृषक गेहूं चना आदि की फसल के लिए खेतों को पानी दे रहे हैं उक्त पानी से पानी में मिले खनिजतत्व मिट्टी की तह में जमेंगे, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो सकती है। प्रदूषित पानी जिस तरह इंसानों की सेहत खराब करता है वही असर फसलों पर भी होता है और प्रदूषित पानी की सिंचाई से पैदा होने वाली फसलें भी सेहत के लिए हानिकारक होती है।
नहर से जुड़े हैं ये गांव
 जल उपभोक्ता संस्था गांधीग्राम के अंतर्गत  लगभग 14 ग्राम जुड़े हुए हैं।जिनमें
ग्राम बम्होरी,पिपरिया, देवनगर,मिढ़ासन, कैलवास, उमरिया,कैलवास,पथरई,शहजपुरा, तपा, ख़ुड़ावल, धनगवां,कुकरई,चन्नौटा गाँव हैं। 

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