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"शिव ज्योति" में आई दरार?? फिर गिर जाएगी प्रदेश की सरकार?? 

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – MP उपचुनाव के बाद होने वाले शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार अधर में अटक गया है। वर्तमान में शिवराज कैबिनेट में 28 मंत्री है, संख्या के लिहाज से छह मंत्री और बनाए जा सकते है, इसमें गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी राम सिलावट को मंत्रीपद मिलना तय है, वही अन्य बीजेपी विधायकों को शामिल किया जा सकता है, हालांकि यह अभी तय नही है कि कौन कौन से विधायकों को जगह मिलेगी। 

बता दे कि उपचुनाव के नतीजे आए हुए भी एक माह से ज़्यादा हो गया हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यसभा सांसद ज्योतिारादित्य सिंधिया की कई बैठके भी हो चुकी है, बावजूद इसके अबतक बहुप्रतीक्षित शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार नही हो पाया हैं। इधर, मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत के शपथ ग्रहण लेने का मामला भी अधर में लटक गया हैं। 

सुत्रों की माने तो नए साल में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है, चुंकी 28 दिसंबर से मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरु होने वाला है, ऐसे में शिवराज का फोकस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव पर बना हुआ हैं।  इन सबके बीच खबर है की अगर गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी राम सिलावट को जल्द ही मंत्रिमंडल मे शामिल नही किया गया तो बाकी के 7 सिंधिया समर्थक भी मंत्रीपद से इस्तीफा दे सकते हैं। इतना ही नहीं खबर ये भी है की ज्योतिारादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के इस्तीफे को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी बात चीत कर सकते हैं। 

इस से पहले सिंधिया कैबिनेट के विस्तार को लेकर ये कहते आए है कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार हैं। जबकि महाराज समर्थक मंत्रियों को लग रहा है कि शिवराज सिंह चौहान ज्योतिरादित्य सिंधिया को दरकिनार कर रहे हैं। वहीं, मंत्रिमंडल में देरी होने को लेकर शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि प्रदेश में कोरोना की वजह से और वैक्सीनेशन की तैयारी की वजह से मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हो रही हैं। 

सिंधिया समर्थकों की इस्तीफ़े की खबर सामने आते ही प्रदेश में इस बात की अटकलें तेज़ हो चली है की सिंधिया अपनी मांगो को लेकर शिवराज पर हावी हो रहे हैं। इसके अलावा इस बात की भी चर्चा ज़ोरो पर है की क्या दोबारा प्रदेश में सियासी घमसान शुरू होने वाला हैं?? क्या वापस राज्य की सरकार गिर जाएगी?? 

बहरहाल अब देखना दिलचस्प हो गया है की आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत किस स्तर पर जाती हैं। क्या सिंधिया की मांगे पूरी होती है या फिर इस्तीफे का दौर चलता हैं। 

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