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फैक्ट चेक- धर्म को कब तक हथियार बनाकर खेलेंगे संबित पात्रा(sambit patra), सागर में जले युवक को लेकर संबित पात्रा का दावा गलत

 

सागर : सागर(sagar) के मोतीनगर से एक दिल दहला दने वाली खबर आयी थी। सूत्रों के अनुसार मोतीनगर के धर्मश्री की आवासीय कालोनी से बुधवार रात को एक युवक के जलाने का मामला सामने आया हथा। बताया जा रहा है कि कुछ युवकों में बच्चो के छोटे से विवाद को लेकर कहासुनी हो गई थी। जिसके बाद एक युवक धनप्रसाद अहिरवार को कुछ युवकों ने केरोसिन(kerosene) छींटकर आग लगा दी थी।

इस मामले में पुलिस(police) ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया था। दो दिन पहले भी दोनों पक्षों में विवाद हुआ था, लेकिन मोतीनगर पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर लौटा दिया था। पुलिस के अनुसार धर्मश्री आवासीय कॉलोनी में रहने वाले धनप्रसाद पिता निजाम अहिरवार (24) को कालोनी के छुट्टू, अज्जू पठान, कल्लू व इरफान ने आग लगाकर मारने की कोशिश की।जिसके बाद आनन फानन में उसे बुंदेलखंड अस्पताल(hospital) में भर्ती करवाया गया था। धनप्रसाद के भाई ने बताया कि आरोपियों से बच्चों को लेकर विवाद हुआ था। इसी मामले में बाकी के युवक पीड़ित पर समझौता करने का दवाब बना रहे थे। जिसके बाद विगत 14 जनवरी को सबने घेरकर उसे आग के हवाले कर दिया था।

संबित पात्रा(sambit patra) ने कहा था की 15 से 20 मुस्लिम लड़को ने एक दलित युवक को जलाया और अब मीम, भीम चुप क्यों हैं, क्या प्रियंका गांघी उसके घर जाएँगी। लोकनीति ने पड़ताल की और पाया की उसको जलाने वालों में मुस्लिम लड़कों के साथ उनके हिन्दू दोस्त भी थे। दोनों धर्म के लोग थे तो संबित पात्रा ने सिर्फ मुस्लिम लोगों को ही क्यों नोटिफाई किया। ऐसा करके वो क्या हासिल करना चाहते हैं बीजेपी के लोकतंत्र की क्या यही परिभाषा है।

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