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सीधी : इधर डिजिटल पढ़ाई और उधर महुआ बीनते छात्र, वाह जी डिजिटल एजुकेशन

सीधी.

लॉकडाउन के चलते हुए तालाबंदी में शिक्षकों के तमाम तर्कों को नजरंदाज कर स्कूलों में डिजिटल पढ़ाई शुरू की गई है। छात्रों को ह्वाट्सएप से जोड़ने की बात कही गई है ताकि रोजाना उनकी कक्षाएं संचालित हो सकें। पर ये क्या, ये तो महुवा बीनने में जुटे हैं। इनकी ओर किसी का ध्यान ही नहीं। बस कोरम पूरा किया जा रहा है पढ़ाई का। ये हाल है मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाके सीधी का। अब शासन ने तो निर्देश जारी कर दिया है डिजिटल क्लास चलाने का। सरकार सरकारी पाठशालाओं में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं डिजिटली संचालित करा रही है। कहा गया है कि सभी छात्रों या उनके अभिभावकों के मोबाइल नंबर के जरिए ह्वाट्सएप ग्रुप बनाया जाए। इस ग्रुप में भोपाल के शिक्षाविदों द्वारा तैयार कक्षावार नोट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये नोट्स जनशिक्षकों के माध्यम से स्कूलों के शिक्षकों के ग्रुपों में भेजा जाता है। स्कूल शिक्षक इसे छात्रों और अभिभावकों के ह्वाट्सएप ग्रुप में भेजते हैं। पढाई का यह नुस्खा पहली अप्रैल से जारी है।

लेकिन हकीकत ये है कि डिजिटल पढाई की यह व्यवस्था महज औपचारिक बन कर रह गई है। अब सवाल यह है कि ग्रामीण अंचल और खास तौर पर आदिवासी इलाकों में छात्रों और अभिभावकों के पास स्मार्ट या एंड्रॉयड फोन हो तब तो वे इन कक्षाओं में पढ़ सकें। लिहाजा ये सभी इस डिजिटल पढाई से पूरी तरह से अलग हैं। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पहली से आठवीं तक के 75 फीसदी बच्चे इस नवीन शिक्षा प्रणाली से जुड़ ही नहीं पाए हैं। बच्चों को इस प्रणाली का पता ही नहीं है। जिले के कुसुमी व मझौली अंचल के आधे से अधिक आदिवासी परिवार के बच्चों को डिजिटल क्लास के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं। कुसुमी ब्लॉक के कुंदौर, अमरोला, कुरचू ताल, दुबरी, डेवा, चिनगवाह, खरबर, देवमठ, बिटखुटी , मौढ़िया जैसे अनेक गांव हैं जहां के बच्चों को पढाई की इस नवीन व्यवस्था की जानकारी ही नहीं। ऐसे बच्चों से जब पत्रिका ने बात की तो उन्होंने बताया कि वो तो इस वक्त महुआ बीन रहे हैं। ये ऑनलाइन पढ़ाई के बारे में नहीं जानते, स्कूल खुलेगा तो जाएंगे।

“जिन छात्रों और अभिभावकों के पास एंड्रॉय़ड फोन नहीं है उन्हें डीजीलेप में जोड़ लिया गया है। हांलांकि जिनके पास ऐसे मोबाइल नही हैं या जिन गांवों में नेटवर्क की दिक्कत है वहां के छात्र इस ऑनलाइन एजुकेशन से वंचित हैं। ऐसे करीब 75 प्रतिशत बच्चे हैं।

डॉ केएम द्विवेदी, जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र सीधी “

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