रायसेन : मां भवानी की महिमा को आज तक कोई भी नहीं समझ पाया, नवदुर्गा में भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुँचे 

 रायसेन : मां भवानी की महिमा को आज तक कोई भी नहीं समझ पाया, नवदुर्गा में भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुँचे 

रायसेन से अमित दुबे की रिपोर्ट : - मां भवानी की महिमा को आज तक कोई भी नहीं समझ पाया है। भारत के अलग-अलग स्‍थानों पर देवी मां के अलग-अलग स्‍वरूपों में कई चमत्‍कार देखने-सुनने को म‍िलते हैं। कभी मंदिर में देवी की मूर्तियों की बातचीत का चमत्‍कार तो कभी मंदिर में रंग बदलती मूर्ति का रहस्‍य। इनसे आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है। ऐसा ही एक रायसेन का कंकाली मंदिर। जहां माता की मूर्ति की टेढ़ी गर्दन एक द‍िन के ल‍िए सीधी हो जाती है। नवदुर्गा में भारी संख्या में लोग में के दर्शन ने लिए पहुँचते है।                                                                                                                                                

कंकाली माता मंदिर रायसेन जिले के गुदावल गांव में हैं। दावा क‍िया जाता है क‍ि यहां मां काली की देश की पहली ऐसी मूर्ति है ज‍िसकी गर्दन 45 ड‍िग्री झुकी हुई है। मंदिर की स्थापना तकरीबन 1731 के आस-पास मानी जाती है। ऐसी मान्‍यता है क‍ि इसी वर्ष खुदाई के दौरान यह मंदिर मिला था। हालांक‍ि मंदिर कब अस्तित्व में आया इसकी तारीख या वर्ष का कोई सटीक प्रमाण नहीं म‍िलता है। मंदिर की स्‍थापना को लेकर यह भी सुनने में आता है क‍ि स्‍थानीय न‍िवासी हर लाल मेडा को इस मंदिर के बारे में एक सपना आया था। इसके बाद उन्‍होंने देखे गये सपने के आधार पर उक्‍त जमीन पर खुदाई करवाई तो देवी मां की मूर्ति मिली थी। इसके बाद प्राप्‍त मूर्ति के स्‍थान पर ही देवी मां की मूर्ति स्‍थाप‍ित करवा दी गई। तब से ही मंद‍िर के विस्‍तार और पूजा-अर्चना का क्रम जारी है। पुजारी जी ने बताया कोरोना कल में पूजन में कोई बदलाब नही हुआ पूर्व की तरह की पूजन की जा रही है कोरोना फैलने के बाद से सिर्फ भक्तों में कमी हुई है यहां सोसाल डिस्टेंस का विशेष धयान रखा जा रहा है।

मंद‍िर को लेकर यह भी मान्‍यता है क‍ि जो भी भक्‍त यहां बंधन बांधकर मनोकामना मांगता है उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। देश के कोने-कोने से भक्‍त यहां अपनी मुरादों की झोली भरने आते हैं। मन्‍नत पूरी होने के बाद बांधा गया बंधन खोल जाते हैं। कहते हैं क‍ि न‍ि:संतान दंपत्तियों की यहां गोद भर जाती है। लेक‍िन इसके लिए महिलाएं यहां उल्‍टे हाथ से गोबर लगाती हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद सीधे हाथ का न‍िशान बनाती हैं। मंदिर में हाथों के उल्‍टे और सीधे न‍िशान नजर आते हैं। यहां हमेशा अखण्ड जोत जलती है। कंकाली देवी मंदिर में स्‍थापित मां काली की टेढ़ी गर्दन दशहरे के द‍िन सीधी हो जाती है। हालांक‍ि आज तक क‍िसी ने ऐसा होता देखा नहीं है। कहते हैं क‍ि जो भी भक्‍त मां की सीधी गर्दन देख लेता है उसके जीवन के सभी कष्‍ट दूर हो जाते हैं। मान्‍यता है क‍ि सौभाग्‍यशाली भक्‍तों को ही मां की सीधी गर्दन के दर्शन होते हैं। नवरात्र के अवसर पर मां भवानी के दर्शनों के ल‍िए यहां पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। वही इस बार श्रद्धालुओं में कमी देखी जा रही है।