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रायसेन : एक RTI ने वन विभाग में मचाया हड़कंप, ये है पूरा मामला

रायसेन से अमित दुबे की रिपोर्ट – जंगल मे अबैध कटाई ओर उत्खनन को रोकने एवं वन्य प्राणियों की रक्षा के मद्देनजर वन विभाग में वन रक्षको ओर वन पालो की नियोक्ति की जाती है पर क्या हो जब येही लोगो ऊपरी कमाई ओर जंगलो में काम से बचने के लिए विभागों में अधिकारियों ,मंत्रियों की चपलुशी कर बाबू बने बैठ जाये तो जंगलो की स्थिति का अंदाज़ा आप अच्छे से लगा सकते हैंं।

वन विभाग में नियमानुसार अगर कोई वन रक्षक शारीरिक रूप से या अपंगता के चलते अपनी सेवाएं न दे पा रहा हो तो सद्भावना पूर्वक उसे कार्यलयों में काम करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है पर इससे उलट रायसेन सामान्य वन मंडल के अंतर्गत बहुत से वन रक्षक अपनी ऊँची पहुँच, जाति ओर अधिकारी की चपलुशी कर चहेते बनकर दसको से विभाग में बाबू बने मलाई चाट रहे हैं। 

जिनकी जानकारी लेने के लिए RTI कार्यकर्ता राहुल लोबंशी ने आर टी आई दायर कर जानकारी चाही जिसके बाद वन विभाग में हड़कंप सा मच गया हैं।

सूत्रों की माने तो जिन वन रक्षको ओर वन पालो की जानकारी चाही गई है उनके द्वारा अपने पूरे सेवा काल मे नाम मात्र भी जंगलों के अंदर काम नही किया गया है ओर न ही किसी वन्य अपराधी को पकड़ा गया है बस चपलुशी ओर पहुच के चलते कुर्शियों पर बैठ आराम फरमा रहे है ओर अपने आपको अधिकारी का रिश्तेदार बातलाकर कर्मचारियों से बशूली कर रहे है और दबाब बना रहे हैं। जिसके कारण जंगलों में काम करने वाले वन रक्षको ओर वन पालो का मनोबल तो टूट ही है बाहि इसके चलते रायसेन वन मंडल में दिन प्रतिदिन वन्य प्राणियों पर हमले हो रहे है बाहि वन्य जीवों के शिकार में भी इजाफा हुआ है जिससे वन्य जीवों के लिए एक गंभीर संकट पैदा हो गया हैं।

इसी क्रम में अगर बात की जाये तो सामान्य वन मंडल के अंतर्गत आने वाले परिक्षेत्रो में भी वन रक्षको की कमी के चलते अबैध उत्खनन जैसी समस्या में भी बहुत हत तक बृद्धि हुई हैं। जिसे वन रक्षको की कामी के चलते काबू पाने में मुश्किलें हो रही है पर क्या किया जा सकता है जब आल्हा अधिकारीयो का ही इन्हें संरक्षण प्राप्त हो  तो फिर डर किस बात का वन अपराधों में धरपकड़ की बात जब भी विभाग के अधिकारियों से की जाती है तो हमेशा स्टाप की कामी का बहाना बनाया जाता है और जिन लोगो पर इनका दाईत्व होता है उन्हें विभाग में अटेच कर निजी लाभ लिया जाता हैं।

अब देखना ये है कि क्या वन मण्डल अधिकारी इन्हें अपनी जिम्मेदारियों पर लौटने के आदेश देगे या ये हमेशा की तरह कुर्शीयो पर बैठे बैठे वन अपराधों ओर उत्खनन जैसी गंभीर समस्याओं को बढ़ने देंगे।

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