Sidhi : लॉकडाउन ने बदल दी इस गाँव के लोगों कि ज़िन्दगी, बुजुर्गो का कहना जीवन में नहीं देखा ऐसा बंद

- लॉकडाउन से हुए सकारात्मक सामाजिक बदलाव, शराब बंदी से भी गांव में लौटी खुशहाली
कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते जहां पूरी दुनिया थम सी गई है। वहीं कोरोना वायरस के कारण देश भर में घोषित किए गए लॉक डाउन से इसके कुछ सकारात्म पहलू भी देखने को मिल रहे हैं। गांवों में व्यर्थ में बैठकर गप्पेबाजी बंद हो गई है, लोग या तो घरों में रहकर घर के आवश्यक कार्य कर रहे हैं या फिर खेती किसानी के कार्य में व्यस्त हैं। लॉक डाउन के कारण शराब बंदी का भी एक सकारात्मक पहलू सामने आया है, शराब न मिलने से गांव में शराबियों का उत्पात लगभग समाप्त हो गया है, जिससे आपराधिक घटनाएं भी कम हो गई हैं। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि इस तरह की बंदी जीवन में कभी नहीं देखी। इसके साथ ही गांव के चौराहों में ताशपत्ती का खेल भी अब नहीं खेला जा रहा है। मृत्युभोज आदि भी बंद हो गए हैं। पत्रिका द्वारा गांव के पांव अभियान के तहत जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत पथरौला गांव की ग्राउंड रिपोर्ट कर वहां के बुजुर्गों से इस लॉक डाउन पर विचार लिए गए हैं, गांव के बुजुर्गों ने अपने विचार साझा किए।
ग्रामीणों का क्या कहना
79 वर्षीय रामनिहोर मिश्रा कहते हैं लॉकडाउन के संबंध में हमने कभी नहीं सुना था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय का आपातकाल जरुर देखा हूं। नौकरी से रिटायर होने के बाद घर पर ही रहते हैं। लॉक डाउन के पहले हम उम्र के आस पड़ोस के लोग सुबह शाम आ जाते थे। दरबार करने अथवा अध्यात्मिक चर्चाओं में समय व्यतीत हो जाता था। जब से देश में लॉक डाउन हुआ है, तब से घर में ही रहते हैं। कोई घर में आता जाता ही नही है। बड़े मुश्किल से समय कटता है।
हमने न कभी लॉक डाउन देखा था, न ही कभी सुना था। कई बीमारियों का नाम व वायरस का नाम भी सुना हूं। लेकिन कोरोना वायरस नामक संक्रमित महामारी का नाम पहली बार सुना हूं। इससे देश बहुत पीछे चला गया। शादी विवाह सहित अन्य धार्मिक आयोजनों में भी पूर्ण विराम लग गया है। लोग किसी के गमी में भी नहीं जा सकते हैं। कैसा समय आ गया है।
अमृतलाल गुप्ता, 57 वर्ष पथरौला
मैंने दो चीज नोटबंदी और लॉक डाउन पहली बार देखा और सुना है। कोरोनावायरस नामक संक्रमित महामारी से जितनी मौतें हुई हैं, पहले कभी सुनने को नहीं मिला है। पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। अपनों से ही महीने भर से मुलाकात नहीं हुई है। कहीं भी चार छ: लोग एकत्रित नहीं हो पाते हैं। इस महामारी ने देश को बहुत पीछे ढकेल दिया है। भगवान जाने देश का क्या होगा।
चंद्रिका गुप्ता, 61 वर्ष पथरौला
मैने इंदिरा सरकार के समय का आपातकाल देखा है। कोरोना वायरस नामक संक्रमित महामारी जैसे हालात कभी नहीं देखा है। इस तरह की मौतें भी कभी नहीं देखा। इस लॉक डाउन के कारण वैवाहिक कार्यक्रम सहित धार्मिक आयोजनों में पहली बार रोक लगी है। तास फ लास खेलकर हम उम्र लोगों के साथ समय गुजर जाता था। अब तो अकेले बैठकर ही घर में समय व्यतीत करना पड़ता है। देश बहुत पीछे चला गया।
विजय सिंह चौहान, 68 वर्ष



