परमाणु हमला करने में सक्षम राफेल आ रहा है भारत, पाकिस्तान के एफ-16 और चीन के जे-20 को देगा टक्कर।
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- परमाणु हमला करने में सक्षम राफेल आ रहा है भारत,
- पाकिस्तान के एफ-16 और चीन के जे-20 को देगा टक्कर
- अम्बाला में होगी तैनाती,
- स्क्वाड्रन नंबर – 17 को मिलेगी राफेल की सौगात
नई दिल्ली/गरिमा श्रीवास्तव :- भारतीय वायुुसेना को और ताकतवर बनाने वाला राफेल कल भारत आ रहा है। यह लड़ाकू विमान राफेल बिड जीतने के 8 साल 5 महीने 29 दिन बाद कल अंबाला एयर बेस पर पहुंचेगा। इस दौरान 3 किलोमीटर तक अंबाला एयरबेस को नो ड्रोन जोन घोषित किया गया है।
31 जनवरी 2012 में दैसो राफेल ने 126 एयरक्राफ्ट सप्लाई की एमएमआरसीए बिड जीती थी। जिसके बाद नए सौदे के तहत 10 अप्रैल 2015 को 36 विमान की खरीद की घोषणा की गई..
अब कल यानी 29 जुलाई को 7000 किलोमीटर की दूरी तय कर यह पांच विमानों की खेप भारत पहुंचेगी।
इंडियन एयरफोर्स में कुल 42 स्क्वाड्रन हैं। लेकिन दिसम्बर 2019 में लास्ट मिग-27 फाइटर के रिटायर होने के बाद, स्कवाड्रन नंबर – 29 “नंबरप्लेटेड” यानी डिएक्टिव हो गई थी। दिसम्बर 2019 तक कुलमिलाकर 15 एआईएफ स्कवाड्रन नंबरप्लेटेड हो गईं थीं। जिसके चलते आइएफ के स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 42 से 67 हो गई थी। 1970 के बाद पहली बार आईएएफ में इतनी लो स्ट्रेंथ स्क्वाड्रन एक्टिव थी।
जनवरी 2020 में सुखोई-30 एमकेआई के इंडक्ट होने से, आईएएफ में एक्टिव स्क्वाड्रन की संख्या 28 हो गई थी। 28 एक्टिव स्क्वाड्रन के पास 6 अलग-अलग फाइटर जेट थे। जिसमें सुखोई 30 एमकेआ की ग्यारह स्कवाड्रन , तीन मिराज 2000 की स्क्वाड्रन, छह जगुआर की स्कवाड्रन, तीन मिग-29 यूपीजी की स्क्वाड्रन, एक स्वदेशी तेजस की स्क्वाड्रन और मिग-21 की चार स्क्वाड्रन थी।
2016 के बाद मई 2020 में एक बार फिर स्वदेशी तेजस आईएफ में इंडक्ट हुआ, स्क्वाड्रन नंबर – 18 को तेजस से इक्विप्ड किया गया। यह वही स्क्वाड्रन है, जिससे मिग-27 रिटायर हुआ था। इस हिसाब से अभी इंडियन एयरफोर्स की 42 में से 29 स्क्वाड्रन एक्टिव हैं। 29 जुलाई को राफेल, अम्बाला में स्क्वाड्रन नंबर-17 में इंडक्ट किया जायेगा। जिससे कि एआईएफ में एक्टिव स्क्वाड्रन की संख्या 30 हो जाएगी।

भारतीय वायुसेना को रफाल की जरूरत क्यों है…? उसके आने से किस तरह के बदलाव भारतीय वायुसेना में देखने को मिलेंगे?
बीबीसी में छपे एक लेख में रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी के मुताबिक ” राफेल के आने से भारतीय एयर फ़ोर्स की ताक़त बढ़ेगी, लेकिन इसकी संख्या बहुत कम है. बेदी का मानना है कि 36 रफ़ाल अंबाला और पश्चिम बंगाल के हासीमारा स्क्वाड्रन में ही खप जाएंगे। दो स्क्वाड्रन काफ़ी नहीं हैं। भारतीय वायु सेना की 42 स्क्वाड्रन आवंटित हैं। और जितने स्क्वाड्रन अभी एक्टिव हैं उस हिसाब से तो लड़ाकू विमान ही नहीं हैं। हमें गुणवत्ता तो चाहिए ही, लेकिन साथ में संख्या भी चाहिए। अगर आप चीन या पाकिस्तान का मुक़ाबला कर रहे हैं तो आपको लड़ाकू विमान की तादाद भी चाहिए। न के पास जो फ़ाइटर प्लेन हैं वो हमसे बहुत ज़्यादा हैं. रफ़ाल बहुत अडवांस है, लेकिन चीन के पास ऐसे फ़ाइटर प्लेन पहले से ही हैं. पाकिस्तान के पास एफ़-16 है और वो भी बहुत एडवांस है. रफ़ाल साढ़े चार जेनरेशन फ़ाइटर प्लेन है और सबसे अडवांस पांच जेनरेशन है। रफ़ाल हमें बना बनाया मिला है. इसमें टेक्नॉलजी ट्रांसफ़र नहीं है. रूस के साथ जो डील होती थी उसमें वो टेक्नॉलजी भी देता था. हम इसी दम पर 272 सुखोई विमान बना रहे हैं और लगभग फ़ाइनल होने के क़रीब हैं. हमारी क़ाबिलियत तकनीक का दोहन करने के मामले में बिल्कुल ना के बराबर है।


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