जेपी अस्पताल बदहाल! ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी पर डॉक्टर सिर्फ 56, इलाज के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार
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जेपी अस्पताल बदहाल! ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी पर डॉक्टर सिर्फ 56, इलाज के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार
- जेपी अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा, डॉक्टरों की संख्या कम
- इलाज के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतज़ार
- ओपीडी में बड़ी मरीजों की संख्या, डॉक्टर सिर्फ 56
भोपाल :- कोरोना संक्रमण की रफ्तार अब मध्यप्रदेश में कम हो चुकी है. संक्रमण की स्थिति सुधरने के बाद जेपी अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है.
लेकिन मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है…
वजह यह है कि डॉक्टरों की संख्या काफी कम है और यही वजह है कि मरीज परेशान हो रहे हैं.
खासकर ENT और नेत्र रोग विभाग में डॉक्टरों की कमी काफी खल रही है. पहले यहां ओपीडी में रोजाना 1000 मरीज आते थे. लेकिन अब मरीजों की संख्या पंद्रह सौ से अधिक हो चुकी है
इतने मरीजों के लिए होने चाहिए 125 डॉक्टर लेकिन मौजूद सिर्फ 56
जानकारी से यह बात सामने आई है कि इतने मरीजों के इलाज के लिए कम से कम 125 डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन यहां सिर्फ 56 डॉक्टर ही है इसमें 30 असिस्टेंट सर्जन है.
और बाकी 26 विशेषज्ञ डॉक्टर है जेपी अस्पताल में विशेषज्ञों के 43 पद स्वीकृत हैं इनमें से 19 पद खाली पड़े हुए हैं. 4 डॉक्टर वीआरएस ले कर जा चुके हैं
अब इनकी पूर्ति करने के लिए 29 स्टूडेंट से काम चलाया जा रहा है जो दूसरे जिलों से सीपीएस कोर्स करने के लिए जेपी आए हुए हैं.
इन खाली पदों को भरने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य और विभाग की है पर प्रमोशन का मामला अटकने की वजह से रिक्त पदों पर सीधी भर्ती करने का मामला अभी तक होल्ड है.
अभी शनिवार को दोपहर 12:30 बजे ईएनटी विभाग के कमरा नंबर 54 के सामने 1 दर्जन से अधिक मरीज आधे घंटे से 1 घंटे तक इंतजार करते रहे लेकिन कोई भी डॉक्टर नहीं आया और बाद में इलाज का इंतजार करते-करते मरीज वापस लौट गए. वहां मौजूद एक महिला ने बताया कि डॉ लौटकर आएंगे वह एक सर्जरी करने गए हैं लेकिन मरीजों ने इंतजार किया और डॉक्टर नहीं आए बताते चले कि ENT विभाग में एकमात्र डॉ एच एन साहू पदस्थ है. वह सप्ताह मे सिर्फ 3 दिन बैठते हैं जबकि इस विभाग में हर रोज़ करीब 80 मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं.
सोनोग्राफी का भी यही हाल है.
अस्पताल प्रबंधन का कहना मरीजों को नहीं होने देंगे परेशान
अस्पताल प्रबंधन द्वारा यही बात कही जाती है कि कोई भी परेशानी नहीं होगी लेकिन लगातार देखा जा रहा है कि मरीजों को परेशानियों का सामना उठाना पड़ रहा है.. आगे देखना होगा कि इन सारी बातों के बाद अब अस्पताल की क्या कुछ स्थिति होगी

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