अब शिवराज के चहेते नहीं बल्कि कमलनाथ के चहेते निकालेंगे रेत ?

अब शिवराज के चहेते नहीं बल्कि कमलनाथ के चहेते निकालेंगे रेत ?

अब शिवराज के चहेते नहीं बल्कि कमलनाथ के चहेते निकालेंगे रेत ?

कहते हैं समय समय की बात होती है, जब आपका समय होता है तब छोटी मोटी पावर से भी बड़े-बड़े काम कराए जा सकते है। लेकिन जब पावर चली जाती है तब बड़ा दुख देती है, हालांकि जिन्होंने मोटी कमाई कमाली हो उनके लिए गई हुई पावर भी उतना दुख नहीं देती है। ज्यादा भूमिका में ना रखते हुए आपको आज का समाचार सुनाना चाहते है, मध्यप्रदेश में पूर्व की सरकारों में जिन्हें रेत के ठेके मिलते थे, उनके ठेके अब उनसे लिए जा चुके हैं। अब वह वर्तमान सरकार के चहेतों को मिलेंगे, हर सरकार का यही दस्तूर होता है। जो उनका करीबी होता है वही ठेके में हिस्सेदारी भी करता है, हालांकि प्रायः सभी सरकारें इसको पारदर्शिता का हवाला देकर राइट पॉलिसी डिस्ट्रीब्यूशन की ही बात करती है, कि देखिए सब कुछ सही हो रहा है, देखिए सब कुछ पारदर्शी है, देखिए सब कुछ सही है, हमारे समय में सब सही है, जो उनके समय में सब गलत था । अगली पार्टी की सरकार आएगी और वह भी यही कहेगी देखिए सब कुछ सही है, जो उनके समय में गलत था। कहने का आशय यही है कि जिसका समय होता है, वह सही होता है।और जिसका समय चला जाता है, वह गलत होता है। जनता यह बात बहुत अच्छे से जानती है, जानना भी चाहिए आखिर वह जनता जो है। टैक्स देती है तो नागरिक बनने का अधिकार भी अपने पास रखती है।तो वहीं तमाम तरह के कर्तव्य भी उसको निभाने के लिए दिए गए है और निभाने भी चाहिए आखिर आप स्वस्थ लोकतंत्र में जीवन जीते है।

खैर बात करे पूर्व समय की तो जान लीजिए की शिवराज सरकार में जितने उनके खास थे, चाहे वो उनके घर के लोगों या उनके मंत्री हो, या उनके विधायकों के करीबी या उस समय के विधानसभा अध्यक्ष के करीबी रहे हो। सबको बराबरी तौर पर ठेके मिलते थे और अब उन्हें नहीं मिलेंगे क्योंकि उनकी जगह वर्तमान कमलनाथ सरकार के चहेतों ने ले रखी है और वैसे भी अब कुछ ही महीनों में चुनाव का दस्तूर भी शुरू हो जाएगा। यहां पर पंचायत चुनाव, जिला पंचायत चुनाव,आदि अनेक चुनाव देखने को मिलेंगे। जहां पर की फंड की जरूरत होगी, जो यही चहेते उपलब्ध करवाएंगे। मध्यप्रदेश की यही गाथा है, क्योंकि एमपी अजब है और सबसे गजब हैं।

वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हो मध्य प्रदेश के बड़े संत कंप्यूटर बाबा हो या प्रदेश के मामा और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह हो सब जानते हैं कि बिना रेता निकलवाए कोई पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती और इसीलिए सरपंच से लेकर वीडीसी, एमएलसी सब रेत निकालने में लगे रहते हैं और जबरदस्त काली कमाई करते रहते हैं क्योंकि रेत मुरम से ज्यादा काली कमाई कहीं पर भी नहीं है। और सरकार अपने ही राजस्व पर लगाम लगाने के लिए दिखावे की कार्यवाही भी करती है, जिसके तहत कुछ कंपनियों की रेत को राजसात किया जाता है, ताकि जनता को बताया जा सके कि सरकार भी कुछ कर रही है। बाकी सब जानते हैं की सरकार व पुलिस चाह ले तो रेत की एक डग्गी भी ना निकल पाए। परंतु आखिरकार सरकार भी किसी पार्टी की होती है और पार्टी में नेता होते हैं और नेताओं को चुनाव लड़ना पड़ता है जिसके लिए फंड की जरूरत पड़ती है लेकिन बड़ी बात तब होगी जब मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरी तरह से रेत के अवैध उत्खनन को बंद कर देंगे जो की पूरी तरह से नामुमकिन नजर आता है क्योंकि यह पूरी की पूरी एक चेन बन चुका है। जिसमें सिस्टम के ऊपर से लेकर नीचे तक के व्यक्ति तक शामिल है, क्योंकि यह कमाई का बहुत ही बड़ा जरिया है कोई इसे गंवाना नहीं चाहता बाकी बात सब बड़ी-बड़ी ही करते रहेंगे देखते रहिए कहानी बहुत बड़ी और लंबी है।