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सरकार के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने से ज़्यादा जरुरी है दमोह उपचुनाव…

सरकार के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने से ज़्यादा जरुरी है दमोह उपचुनाव…

 

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण चरम पर पहुंच चुका है, आज शाम से 60 घंटे प्रदेश बंद हो चुका है.. कोरोना का कहर चारों तरफ है पर ऐसा लगता है कि जिस जगह पर चुनाव है उस जगह कोरोना नहीं पहुंच पा रहा है. और यह आपको ऐसे समझ में आएगा कि सरकार ने जहां पूरे प्रदेश भर में 60 घंटे बंदी है तो वही दमोह सीट जहां 17 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं वहां यह नियम लागू नहीं होंगे. क्यों नहीं होंगे, यह बड़ी वजह है

प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए गुरुवार को सीएम शिवराज ने सभी शहरों (नगरीय क्षेत्रों) में शनिवार-रविवार दो दिन के लॉक डाउन का फैसला लिया। हालांकि, दो दिन पहले ही मध्यप्रदेश के सभी शहरों में नाइट कर्फ्यू की घोषणा की गई थी। लेकिन बुधवार को 24 घंटे में रिकॉर्ड 4324 कोरोना मरीज आने के बाद सरकार ने शनिवार-रविवार लॉकडाउन का ऐलान किया। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। CM ने कहा कि यह लॉकडाउन शुक्रवार शाम 6 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक यानी कुल 60 घंटे का होगा। साथ ही यह भी कहा कि मेरी मंशा कभी भी लॉकडाउन की नहीं रही हैं। 

अब इस लॉकडाउन में खास बात ये है कि सरकार का यह फैसला दमोह को छोड़कर मध्यप्रदेश के सभी बड़े-छोटे शहरों में लागू होगा। दमोह में रोजाना औसतन 28 कोरोना केस आ रहे हैं। यहां अब तक 94 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। यह प्रदेश में मौत के मामले में नौवें नंबर पर है। चार अप्रैल को ही यहां एक मौत दर्ज की गई हैं। लेकिन यहां पर 17 अप्रैल को विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान होना है, जिसको देखते हुए सरकार ने इसे लॉक डाउन से मुक्त रखा हैं। साथ ही आदेश में ये लिखा गया है की यहां का फैसला जिला निर्वाचन अधिकारी करेंगे। 

सरकार के इस आदेश पर विपक्ष ने सवाल खड़े किये हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने ट्वीट करते हुए शिवराज सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा की – काश पूरे मध्य प्रदेश में आज चुनाव हो जाएँ। सरकार कह रही है मध्य प्रदेश में पूर्ण लॉक्डाउन रहेगा केवल दमोह को छोड़ कर। क्यूँ? वहाँ चुनाव हैं इसलिए कोरोना डर गया?

बता दे कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक दमोह में कुल एक्टिव केस 199 हैं। पिछले 24 घंटे में दमोह में 30 कोरोना संक्रमित केस मिले हैं।

खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दमोह में चुनावी प्रचार प्रसार कर रहे हैं. सीएम की रैलियों में बड़ी संख्या में भीड़ हुई, तो अब इसका क्या मतलब निकाला जाए यानि सरकार की इन नियमों को देखकर ऐसा कह सकते हैं कि कोरोना सरकार की मर्जी से आता है और सरकार की मर्जी से जाता है.

 पूरे प्रदेश भर के शहरी क्षेत्रों में लॉकडाउन लगाया गया है और सिर्फ दमोह में ऐसी बड़ी छूट क्यों दी गई है.

 सरकार के इस लॉकडाउन से जनता काफी परेशान हो रही है.

 मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है पर सरकार का पूरा ध्यान उपचुनाव पर है. जनता को लुभाने के लिए खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान रैलियां कर रहे. दूसरी तरफ कोरोना से लोग मर रहे हैं मौत के आंकड़े छुपाए जा रहे हैं. अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है.

 इन सबके बीच चुनाव को सरकार प्रथम वरीयता दे रही है.

 जनता मर रही है और सीएम चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं..

 आने वाले समय में ऐसे हालात को देखकर अंदेशा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में स्थिति और भयावह होने वाली है.

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