भारत के सबसे घने जंगल के बीच” स्वर्गद्वार ” का रास्ता जो साल में केवल 10 दिन खुलता है ,पढ़िए यहाँ

भारत के सबसे घने जंगल के बीच” स्वर्गद्वार ” का रास्ता जो साल में केवल 10 दिन खुलता है ,पढ़िए यहाँ

सतपुड़ा के घने जंगलों के बीच में एक ऐसा देव स्थान है,

जो साल में सिर्फ 10 दिन खुलता है

सालभर इस स्थान पर कोई इंसान नहीं आता,

कदम कदम पर रहता है जान का खतरा

इस वर्ष यह नागद्वारी यात्रा 25 जुलाई से 5 अगस्त तक है

 

 

 

हर्षित शर्मा /पिपरिया। मध्यप्रदेश के पचमढ़ी सतपुड़ा के घने जंगलों के बीच मे में एक ऐसा देव स्थान है, जो साल में सिर्फ 10 दिनों के लिए नाग पंचमी के दौरान श्रावण माह में ही खोला जाता है। इन दस दिनों में करीब 12-15 लाख भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह पूरी यात्रा बेहद दुर्गम पहाड़ी रास्ते , और नुकीली चट्टानों  से भरी पड़ी है । एक तरफ जिंदगी और एक तरफ मौत हमेशा साथ चलती रहती है। इन दस दिनों के अलावा इस इलाके में खतरनाक जहरीले सांप और जंगली जानवर ही रहते हैं। उस दौरान किसी को यहाँ जाने की  इज़ाज़त नही होती।

भोपाल से करीब 210 किलोमीटर दूर  है

यह स्थान भोपाल से करीब 210 किलोमीटर दूर स्थित है।
यहां पहुँचने का के लिए भोपाल से पिपरिया तक 150 km का सफर जिसमे ट्रैन सुविधा आसानी से मिलेगी पिपरिया रेलवे स्टेशन बस से पचमढ़ी का रास्ता जो लगभग 56 km है।

महाराष्ट्र से आने वाले लाखों लोगों के कुलदेव का स्थान है

 

 

दुनियाभर में प्रसिद्ध पचमढ़ी में नागद्वार यात्रा श्रद्धा का अनूठा स्थल है। यह महाराष्ट्र से आने वाले लाखों लोगों के कुलदेव का स्थान है। पचमढ़ी के घने जंगल और दुर्गम पहाड़ों के बीच एक गुफा में है यह मंदिर। यह मंदिर साल में केवल 10 दिन के लिए खुलता है इस वर्ष यह 25 जुलाई से 5 अगस्त नागपंचमी के तक ही खुलेगा।

कदम कदम पर खतरा

टाइगर रिज़र्व एरिया होने के चलते सालभर इस स्थान पर कोई इंसान नहीं आता। ऐसे में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव इस क्षेत्र में बहुतायात में रहते हैं। जब इस नागद्वार मंदिर के लिए यात्रा शुरू होती है तो कदम-कदम पर सांप-बिच्छुओं से सामना होने का खतरा होता है।

धार्मिक मान्यता के साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए रोमांच से भरपूर है यात्रा।

 

साल में एक बार होने वाली यह यात्रा इतनी रोमांचक होती है कि ट्रैकिंग के शौकीन व्यक्ति भी इस यात्रा को करने पहुंच जाते है। इस रास्ते में कई बड़े-बड़े प्राकृतिक झरने नजर आते हैं। वहीं कई जड़ीबूटियों के पेड़-पौधे भी जानकारों को आकर्षित करते हैं। यहाँ रास्ते इतने दुर्गम है कि हर पल डर बना रहता है कि कभी कदम डगमगाए तो सीधे गहरी खाई में समा सकते हैं।
गिरते पानी में फिसलन भरी ढलान में यह खतरा और बढ़ जाता है। कभी बड़ी-बड़ी चट्टानों से गुजरना होता है। कई बार तो बहते पानी को भी पार करना किसी रोमांच से कम नहीं होता है।

दस दिनों की यात्रा में पहुँचते है लाखों लोग

साल में मात्र दस दिन खुलने वाले नागद्वार यात्रा में करीब 12 से 15 लाख से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। करीब 20 किलोमीटर की यह यात्रा में बीस घंटे से अधिक का समय लगता है।

अमरनाथ यात्रा ये कठिन है यह यात्रा

 

नागद्वारी यात्रा के रास्तों पर अमरनाथ यात्रा का अहसास होता है। कुछ जानकर बताते है कि यह यात्रा अमरनाथ से भी कठिन जिस तरह अमरनाथ यात्रा काफी लंबी है पर रास्ता आसान है, यहां के पहाड़ और गुफा का दृश्य देखकर ऐसा लगता है जैसे आप अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। यात्रा में कदम-कदम पर खतरा बना रहता है। लेकिन यह यात्रा कितने ही खतरों के बाद पूरी की जाती है। प्राकृतिक सौंदर्य यहां का अद्भुत है।

लगते है बड़े बड़े भंडारे

 

इस यात्रा में जहाँ आम लोगो को बिना वजन लेके चलना भी मुश्किल है वहाँ यह के आदिवासी ग्रामीण भारी भरकम समान लेकर ऊंची पहाड़ी पर चढ़ जाते है, जिनका इस्तेमाल समान लेजाने में महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में सेवादार करते है। यहाँ 10 दिन तो भंडारा सेवा की जाती है जिसमे यात्रियों को निःशुल्क भोजन और रात्रि विश्राम की व्यवस्था भी की जाती है।

बड़ी संख्या में सुरक्षा जवान रहते है मौजूद।

श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुरक्षा के लिए यात्रा में पड़ने वाले हर स्थान पर बड़ी संख्या सुरक्षा बलों की तैनाती की जाती है। 
जिसमे जिला पुलिस के महकमा से लेकर सेना के जवानों की मदद भी ली जाती है।