MP : प्रदेश के 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 3500 से अधिक डॉक्टर्स गए हड़ताल पर, मांगे नहीं हुई पूरी तो कोविड में सेवाएं देना भी करेंगे बंद

मध्यप्रदेश/इंदौर/भोपाल – मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स ने सरकार के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखी थीं और यह आरोप लगाया था कि इनमें से कुछ मांगें तो ऐसी हैं जिनका वायदा खुद मुख्यमंत्री शिवराज की ओर से किया गया था। उन्हें एक साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया गया हैं।
जूनियर डॉक्टर्स ने सरकार को चेतावनी दी थी के यदि ये मांगे पूरी नहीं कि गई तो वो हड़ताल पर चले जाएंगे। जिसके असर आज देखने को मिला।
राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में गुरुवार को 3500 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। इसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 6 बड़े अस्पतालों के डाक्टर शामिल हैं।
जेडीए अध्यक्ष डॉ अरविंद मीणा ने बताया कि यदि हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो सभी डाक्टर्स इमरजेंसी सेवाओं का भी बहिष्कार करेंगे साथ ही कोविड वार्ड में भी नहीं जाएंगे, ओपीडी और अन्य सभी प्रकार की सेवाएं बंद कर देंगे।
जूनियर डाक्टरों ने बताया कि हमने एक माह पहले ही सूचना दे दी थी। हमने सरकार को 6 माह पहले इसका नोटिस दे दिया था। जबकि एक माह पहले भी नोटिस दे दिया था कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं हुई तो हम हड़ताल पर चले जाएंगे।
ये है इन जूनियर डॉक्टर्स की मांग
- सरकार की ओर से 6% सालाना मानदेय बढ़ाने का वायदा पूरा किया जाए।
- जूनियर डॉक्टरों के इलाज की बेहतर व्यवस्था की जाए।
- कोरोना के दौरान प्रति महीने 10 हज़ार रुपये मानदेय देने का वायदा पूरा किया जाए।
- जूनियर डॉक्टर्स को ग्रामीण सेवा के बंधन से मुक्त किया जाए।
- कोरोना काल में सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र दिया जाए जिसका फायदा सरकारी भर्तियों में मिले।
इधर, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा है कि डाक्टरों से हमारी बात चल रही है कोई हड़ताल पर नहीं जाएंगे। इससे पहले भी मंत्री विश्वास सारंग जूनियर डॉक्टर्स से मिलने हमीदिया हॉस्पिटल गए थे। और उन्हें ये भरोसा दिया था कि सरकार जल्द उनकी मांगों पर फैसला लेगी। लेकिन अब तक इन डॉक्टरों की मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं। जिसके बाद ये जूनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए हैं।
वहीं, सवाल ये उठ रहा है कि जहां एक तरफ मध्यप्रदेश में कोरोना का कहर बना हुआ हैं। अस्पतालों में मरीज़ों की भीड़ हैं। ऐसे में इन डॉक्टर्स का हड़ताल पर जाना मरीज़ों के लिए जान पर बन गया हैं।



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