MP: सरकार का दावा, सरकारी स्कूलों में हुई बच्चों की बढ़ोतरी, लेकिन आंकड़े कुछ और, सरकार झूठी है या आंकड़े?

- हर साल हो रही सरकारी स्कूलों में बढ़ोतरी, पर बच्चे कम
- 10 सालों में पहली से आठवीं तक के 40 लाख 13 हजार बच्चे हुए कम
- सरकार कराएगी अपने ही दावों के आकड़ों की जाँच
मध्यप्रदेश/निशा चौकसे:- प्रदेश में सरकारी स्कूलों में हर साल साक्षरता दर बढ़ोतरी के दावे किए जाते हैं लेकिन इस सरकारी दावे से हकीकत एकदम अलग है. सरकार कहती है कि स्कूलों में हर वर्ष बच्चों के दाखिले हो रहें हैं जबकि शालाओं में बच्चों की संख्या कम हो रही है.
आंकड़े कुछ इस तरह हैं
प्रदेश में सरकारी स्कूलों में पिछले 10 सालों में पहली से आठवीं तक के 40 लाख 13 हजार बच्चे कम हो गए हैं, इन स्कूलों में 2010-11 में बच्चों की संख्या 100.97 लाख थी, जो 2019-20 में घटकर 65 लाख 84 हजार रह गई. यानी की हर साल 3 लाख 75 हजार बच्चों की संख्या कम हो रही है. यह आकड़ो के अनुसार की संख्या है.
बच्चों की संख्या को लेकर सरकार के हैं यह दावे
सरकार का दावा है कि इन 10 सालों में साक्षरता दर 53% से बढ़कर 70 फीसदी हो गई. माध्यमिक स्कूली शिक्षा का बजट भी 1470 करोड़ से बढ़कर 5000 करोड़ रुपए हो गया है. सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या ने चिंता बढ़ाई है और राज्य सरकार अब यह जांच करा रही है कि आखिर ये 40 लाख 13 हजार बच्चें कहा चले गए. इससे तो यह साफ़ समझ आता है कि राज्य सरकार अपने ही आंकड़ों दोनों तरफ के आंकड़ों की जाँच कराएगी एक तरफ सरकार खुद सरकारी स्कूल में कम हुए बच्चों के आंकड़े बताती है तो साथ ही बोलती है कि दस सालों में साक्षरता दर भी बढ़ चुकी है आखिर सरकार अपने ही दावों के खेल में फस्ती हुई नज़र आ रही है।
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