कलयुग में "धूम्रकेतु" अवतार लेकर पापियों का विनाश करेंगे भगवन श्री गणेश, जानिए उनका यह क्रोधित अवतार..

- कलयुग में बुराई और पापियों का विनाश करेंगे भगवन श्री गणेश
- रिद्धी सिद्धी के स्वामी श्री गणेश का होगा वर्ण धूम्र
- विनय के प्रतीक गजानन इस रूप में क्रोधी भी होंगे
भोपाल/निशा चौकसे:- गजानन, गणराज, एकदन्त, लंबोदर, गौरीसुत, विनायक जैसे अनेक नाम हैं भगवन श्री गणेश के उसमे से एक नाम “धूम्रकेतु” भी है. पार्वती नंदन का महत्वपूर्ण स्वरूप धूम्रकेतु भी हैं जो घोर कलियुग में आने वाला है. बता दें की गणेश जी का यह रूप समस्या और दोषों के साथ पापों का नाश करने वाला होगा जो घोर कलयुग में आएगा. दरअसल महाभारत में कलियुग के बारे में ऐसा कहा गया हैं कि ''लोग अत्यंत स्वार्थी, आडंबरयुक्त, भ्रष्ट और अल्पायु होते जाएंगे. वही जीवन स्तर निरंतर घटेगा. वही मनुष्य अतिकृपण हो जाएगा. और थलचर जीवों के समान भोगी व्यवहार करेगा. ऐसे में घोर कलियुग में धर्म रक्षार्थ भगवान श्री गणेश धूम्रकेतु के रूप में आएंगे. बता दें, कि रिद्धी सिद्धी के स्वामी श्री गणेश का वर्ण धूम्र होगा.'' कहते हैं वह अपने धूम्रवर्ण के कारण ही धूम्रकेतु कहलाएंगे और धूम्रकेतु के दो हाथ होंगे. इसी के साथ उनका वाहन नीले रंग का अश्व होगा और उनके नाम शूर्पकर्ण, धूम्रवर्ण और धूम्रकेतु होंगे.
कलयुग में पापियों का नाश करेंगे श्री गणेश
धूम्रकेतु की देह से नीली ज्वालाएं उठेंगी. विनय के प्रतीक गजानन इस रूप में क्रोधी भी होंगे. पापियों पर उनका क्रोध दण्डस्वरूप होगा. अपनी खड्ग से पापियों के समूल नाश तक वे इसी स्वरूप में रहेंगे. भविष्यपुराण के अनुसार, कलियुग में जब अधर्म बढ़ जाएगा तो धर्म की रक्षा के लिए, दुष्टों का संहार करने के लिए श्रीगणेश चौथा अवतार लेंगे। श्रीगणेश का चौथा अवतार 'धूम्रकेतु' होगा । क्रोध के कारण श्रीगणेश के शरीर और आंखों से आग निकल रही होगी। कलयुग में 'धूम्रकेतु' अवतार का वाहन नीले रंग का घोड़ा होगा ।
तपस्या से प्रसन्न होकर लिया था पुत्र रूप
सतयुग में महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी अदिति की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने पुत्र रूप में उनके घर में जन्म लिया । सतयुग में उनका नाम 'महोत्कट' था। श्रीगणेश का वाहन शेर था और उनके दस हाथ भी थे । भगवान ने अपने इस अवतार में नरान्तक और देवान्तक नाम के असुरों का वध किया । देवान्तक के साथ हुए युद्ध में श्रीगणेश का एक दांत टूट गया था जिससे वो 'एकदंत' भी कहलाए।




