किसान कील और काले कानून , भारत दुनिया के नजरों में, रिहाना से लेकर ख़लीफा क्यों है ख़िलाफ़ ....

किसान कील और काले कानून , भारत दुनिया के नजरों में, रिहाना से लेकर ख़लीफा क्यों है ख़िलाफ़ ....

किसान कील और काले कानून , भारत दुनिया के नजरों में, रिहाना से लेकर ख़लीफा क्यों है ख़िलाफ़ ....

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो, जान थोड़ी है 
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है 

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में 
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है 

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन 
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है 

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है 
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है 

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है 

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में 
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है


तो अब लेख को शुरू करना मेरी आंखों में आंखे डालकर बात करना ही है......

पत्रकार शशांक तिवारी का स्वतंत्र लेख 
 

सच बताओ तुमने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम आज़ाद के मेरे सपनों का भारत 2020 को कोरोना में मरते हुए नहीं देखा.....

यदि नहीं देखा....तो पूछो अपनी सरकार से
जिन मजदूरों ने तुम्हारे बड़े शहर की corporate मंज़िलो और सरकारी दफ्तरों को अपने हाथो से सजाया था, तुमने उन्ही प्रवासी मजदूर के परिवारों के साथ क्या किया???

2020 में corona के कारण पूरी दुनिया परेशान रही लेकिन भारत में राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार इन सबकी लापरवाही देखने को मिली
किसी ने इस विदेशी बीमारी को सीरियस नहीं लिया , पहले तो न एयरपोर्ट सीज़ किए न बडे़ एयरपोर्ट क्लास को रोका गया , जों सेलेब्रिटी हाई फाई सोसाइटी वाले लोग लगातार corona carrier बनते चले गए.....
जब इस बीमारी ने अपना कोहराम मचा दिया तब सरकारे होश में आई, नतीज़ा इतना खतरनाक हों चुका था कि सभी काम की तलाश में आए , दिहाड़ी मजदूर , कारीगर, युवा, बुजुर्ग , बच्चे सभी सैकड़ों किलोमीटर तक ख़ुद ही अपने पैरों से नापना शुरू कर दिया ।।
इसमें केंद्र और राज्य सरकारों ने इक दूसरों पर ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया था । जिसे हम dirty politics कहते है..वे कहते है ये आपके लोग है, ये कहते हमारी जिम्मेदारी नहीं है....
लेकिन किसी भी सरकार ने भारतीय समझ कर एक दूसरे की मदद नहीं कि ....
 इस सबके बावजूद लोगों ने लाखों परेशानी झेली, आर्थिक तंगी, मानसिक रूप से सभी डरे थे , लेकीन हम भारतवासी इक दूसरे के सहारे बनें रहें। इंसानियत का धर्म हमनें सरकार से अच्छा निभाया....

2020 ख़तम होते होते भारत सरकार को नया चैलेंज मिला यह चैलेंज किसान आंदोलन है जो अब आज़ादी के बाद दूसरा बड़ा जन आंदोलन बन गया है इसकी चर्चा पुरे विश्व में हो रहीं है।

बता दें कि 26 नवंबर 2020 से किसान आंदोलन शुरू हुआ तब से आजतक किसान दिल्ली में डेरा डालकर घेराबंदी करने और सरकार को खेती के काले कानून वापस लेने ज़ोर दे रहे है।
इनकी संख्या अनुमानित पहले लाखो में थी अब यह करोड़ों में पहुंचनी वाली है 
भारत में आज महंगाई कितनी अधिक है यह तो सभी जान रहें है और इससे छूट भी चाहते है। लेकिन रास्ता सरकार के पास है और वह सिर्फ़ टैक्स वसूलने और सरकारी दफ्तरों को बेचने मे लगीं है।
अब यह सरकार आजादी भी छीन चुकीं है


कई किसान नेताओं और राजनैतिक दलों ने इसे लोकतंत्र की हत्या भी कह दिया....
क्योंकि किसी भी डेमोक्रेटिक देश में आपको सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन करने की आज़ादी होती है। लेकिन मौजूदा हालात देखकर लगता है जिस तरह तमाशा और तानाशाह रवैया मोदी सरकार दिखा रही है 
अब उन्होंने किसानो के आगे रास्ते में कील बिछा दिए है.….
किले में तब्दील दिल्ली....बॉर्डर पर अपने ही देश के किसानो से लड रही सरकार....


बॉर्डर का नाम सुनते ही हर भारतीयों को अपने दुश्मन पाकिस्तान- चीन बॉर्डर की ख़बर सुनाई देती है लेकिन उसे क्या पता जो फ़ौजी लड़का बॉर्डर पर लड रहा है अब उसका बाप भी बॉर्डर पर सरकार से अपनी बात कहने को लेकर लड रहा है।
सुनते सुनते हो गई 10 वार्ता , सयुंक्त किसान मोर्चा की सरकार से बात हो चुकीं लेकिन अहंकारी सरकार के रावण की तरह 10 मुख है। एक दिशा में बात करने को लेकर तैयार हुई सरकार लेकिन बात के साथ किसानो को तोड़ने के लिए लात , लोहे की रॉड वाले पुलिकर्मियों को भी तैनात किया गया.... किसान आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए रास्ते में कांटे- ख़तरनाक तार भी लगा दिए है।

क्या ऐसा करने से मोदी सरकार किसानो के बीच भरोसा डाल रही है या इसमें और गहरी खाई बनती जा रही है।


क्या इसमें अब बडे़ विद्रोह की संभावना नहीं ...
देश में ऐसे हालात क्यों बनते चले गए??
यह सवाल आप सरकार से पूछे????
लेकिन पूछेंगे कैसे .... क्योंकि national media बिक चुका है और गोदी मीडिया बन चुका है..... वह बिल्कुल सटकर सरकार के तलवे चाटना चाहता है...

अब किसान आंदोलन केवल भारत में नहीं पूरी दुनिया के चर्चा में है.....

किसान आंदोलन को लेकर पॉप सिंगर रिहाना ने एक ट्वीट किया जिसको लेकर पूरी दुनिया के सोशल मीडिया में इसकी जमकर चर्चा हो रही है..... आईटी सेल अब कमज़ोर पड़ गया है क्योकि उनके पापा मोदी के ट्विटर में 60 मिलियन फॉलोवर है वहीं रिहाना के 101 मिलियन फॉलोवर है।
तो चर्चा और भी दिलचस्प हो चली है
अब इसमें पूर्व पॉर्न स्टार्स मिया ख़लीफा ने भी ट्वीट कर दिया है... जिसको लेकर सोशल मीडिया में जमकर बहस और गंदगी भी फ़ैल रही है.... मिया ख़लीफा एक pornstar थीं लेकिन उन्होने यदि एक इंसानी तौर पर ट्वीट किया तो लोग अब उनके काम पर नीचा दिखा रहे है.....ये वहीं लोग है जो रेपिस्ट मानसिकता के होते है..... ये सिर्फ़ विचारधारा की लड़ाई नहीं अब.... किसान आंदोलन पुरे भारत के लिए खड़ा हो चुका है...

बोल के लब आज़ाद हैं तेरे