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जबलपुर : सफाई श्रमिक ठेके को लेकर नगर निगम कि मनमानी, कोर्ट ने दो हफ्ते में निगम कमिश्नर से माँगा उचित जवाब

जबलपुर।

नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा सफाई कार्य के लिए श्रमिकों की पूर्ति के ठेके को लेकर अवैधानिक तरीका अपनाया गया था। इसी को लेकर मे. एच एस सर्विस प्रोवाइडर द्वारा एक याचिका दायर की गई थी जिसमें इस मामले की सही तरीके से जांच की मांग की गई थी। इस मसले पर चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिकाकर्ता की आपत्ति पर पूरा विचार करने के बाद विस्तृत विस्तृत आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता की तरफ से दायर याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि सफाई कार्य के लिए श्रमिकों की पूर्ति के लिए उनके द्वारा आवेदन दिया गया था जिस आवेदन पर नगर निगम द्वारा कोई विचार नहीं किया गया जो कि ना सिर्फ गलत है बल्कि नियमों के खिलाफ भी है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रोहन हर्ने, अरनव तिवारी और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव और नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अंशुमन सिंह थे। इन सभी का पक्ष सुनने के बाद युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए यह आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की आपत्ति का निराकरण 2 सप्ताह के भीतर किया जाए।

अब आप को समझाते हैं कि आखिर क्या है पूरा मामला
दरअसल वर्ष 2019 में जबलपुर नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग के सफाई कर्मचारियों के ठेके के लिए टेंडर निकाला था। टेंडर पिछले वर्ष अगस्त के महीने में निकाला गया था। इस ठेके के लिए मुख्य रूप से दो कंपनियों ने अपने-अपने टेंडर भरे थे। जिसमें पहली कंपनी मैसर्स एच एस सर्विस प्रोवाइडर थी और दूसरी कंपनी मैसर्स राजदीप इंटर. गुजरात द्वारा भरी गई थी। अब इस टेंडर में गुजरात की कंपनी को टेक्निकल ग्राउंड पर खरा न उतरने के चलते निरस्त कर दिया गया। यानी कि मैसर्स राजदीप इंटर का टेंडर टेक्निकल ग्राउंड पर निरस्त कर दिया गया। अब जब वह कंपनी टेक्निकल बेसिस पर ही निरस्त हो गई थी तो सीधी सी बात है कि यह टेंडर दूसरी कंपनी एच एस सर्विस को जानी चाहिए। लेकिन याचिकाकर्ता की माने तो कम्पनी का  Financial bid भी ओपन कर दिया है लेकिन इसके बावजूद इस पूरे ठेके को ही समाप्त कर दिया गया। जो कि पूर्णरूपेण अवैधानिक है।

सीधी सी बात है अगर किसी टेंडर में दो कंपनियों ने बिड किया है और कोई एक कंपनी किसी भी नियम के चलते बाहर हो जाती है तो टेंडर दूसरी कंपनी का होना चाहिए। अगर नहीं हो रहा है तो उसका प्रॉपर रीजन होना चाहिए लेकिन इस मामले में नगर निगम अधिकारीयों ने अपनी मनमानी की है।

अधिकारीयों को कई बार ज्ञापन दिया पर सुनवाई नहीं हुई 

इसके विरोध में मेंसर्स एच एस सर्विस प्रोवाइडर द्वारा कई बार शिकायत की गई और ज्ञापन भी दिया गया। लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस मुद्दे पर ना तो कोई जानकारी दी और ना ही इस मामले में कोई अनुशंसा की गई साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि किन नियमों के चलते इनके टेंडर को निरस्त किया गया है।

इसी मामले पर हाईकोर्ट ने आज नगर निगम कमिश्नर को यह आदेश दिया है कि 2 सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर फैसला किया जाए और आदेश पारित किया जाए।

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