जबलपुर : चीफ जस्टिस के सामने डॉक्टर ने पेश की फर्जी डिग्री, पढ़ें पूरी खबर

- गलत तरीके से मरीजों इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई।
- सरकार ने कोर्ट में कहा एक सप्ताह के भीतर दी जाएगी पूरी रिपोर्ट
जबलपुर। गलत तरीके से मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ लगी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में डॉक्टर ने चीफ जस्टिस के सामने फर्जी डिग्री पेश कर दी। इस पर चीफ जस्टिस नाराज हुए। कोर्ट ने इसके बाद राज्य सरकार को ऐसे डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा एक सप्ताह में पेश करने का आदेश देते हुए डॉक्टर को नोटिस किया कि क्यों न आपकी अग्रिम जमानत निरस्त कर दी जाए।
गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए देश में जब लॉक डाउन लगा था तब मरीजों को गलत तरीके से ईलाज करने वाले डॉक्टरों की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। इन्हीं मामलों को देखते हुए ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को ऐसे डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
सात दिन में बताओं कितनों पर कार्रवाई की।
मरीजों का गलत इलाज करने के मामले में हुई कार्रवाई में जबलपुर के डॉ. जितेंद्र सिंह वर्मा भी शामिल थे, जिन्हें इस मामले में पहले अग्रिम जमानत मिल चुकी है लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जब एक डॉक्टर की डिग्री फर्जी निकली तो उसके बाद हड़कंप मच गया। कोर्ट ने मामले में सरकार को भी आदेश दिया है कि वह ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा एक सप्ताह में पेश करे। सरकार ने भी स्पष्ट कहा है कि फर्जी और गलत तरीके से इलाज करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई लगभग पूरी हो गई है।
जबलपुर उच्च न्यायालय को एक सप्ताह के भीतर सील बंद लिफाफे में प्रिंसिपल रजिस्टार के माध्यम से रिपोर्ट दे दी जाएगी। सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को रखी है।



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