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शहडोल: जिला चिकित्सालय बना मृत्यु केन्द्र, फिर दो बच्चों की हुई मौत, अब तक 28 ने तोड़ा दम, प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालें के कटघरें में ?

शहडोल: जिला चिकित्सालय बना मृत्यु केन्द्र, फिर दो बच्चों की हुई मौत, अब तक 28 ने तोड़ा दम, प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालें के कटघरें में ?
भोपाल/राजकमल पांडे।
ऐसा नही है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मेहनत नहीं कर रही है वह अपने स्तर तक हर संभव प्रयास में है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर आये. अपितु जिनके कंधो में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था दुरूस्त करने का जिम्मा है वही स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं.
जिले में नवजात बच्चों की मौत आंकड़ा दिनों-दिन बढ़ रहा है मंगलवार को दो और बच्चों ने दम तोड दिया है. हालांकि एक बच्चे का प्राइवेट क्लीनिक में इलाज हो रहा था हालत बिगडनें के बाद जिला अस्पताल रिफेर किया गया जिसकर रास्ते में ही मौत हो गई वहीं एक और बच्चे की मौत जिला अस्पताल के शिशु गहन चिकित्सा इकाई में हुई. शिशु रोग चिकित्सक डाॅक्टर मनीष सिंह क्लीनिक पर ले गए थे. जब मंगलवार को बच्ची की हालत बिगडने लगी तो डाॅक्टर ने बच्ची को जिला चिकित्सालय ले जाने को कह दिया. और जब तक बच्ची को जिला चिकित्सालय में लाई जाती तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. जबकि वह परिजनों ने डाॅक्टर पर आरोप लगाया है कि बच्ची तबियत बिगड गई तब रिफेर किया. वहीं मां ने आरोप लगाया कि बच्ची की मौत हो जाने के बाद रिफेर किया गया
गौर तलब है कि मध्यप्रदेश के शहडोल जिला चिकित्सालय में एक माह के भीतर 28 मासूमों ने दम तोड़ दिया है, पूर्व में जिन बच्चों की मौत हुई थी तो मौत की वजह करने हेतु प्रदेश स्तर से जांच टीम बनाई गई थी जिसके बाद सीएमएचओ व सीएम पद से हटाये गए थे. हालांकि पूर्व में इन्हीं जांच टीम ने डाॅक्टरों को क्लीन चिट देकर यह कहा था कि डाॅक्टरों ने नवजातों को बचाने हेतु हर संभव प्रयास किया था. जिसके बाद एनएचएम की एमडी छवि भारद्वाज ने जांच रिपोर्ट को नकारते हुए कहा हम इस जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं. अंततः प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी को निरीक्षण के लिए स्वयं मैदान में उतरना पडा जिसके बाद सीएमओ व सीएमएचओ पद को पद से हटाने को कहा. शहडोल जिला चिकित्सालय का ड्रामा इतने में ही नही थमा सिविल सर्जन और डाॅक्टरों के बीच जंग छिडी है मालूम हो कि मंगलवार को डाॅक्टरों ने अपने त्यागपत्र दे दिए हैं. जिसके बाद सीएमएचओ ने डाॅक्टरों को चेतावनी दी है कि वह काम पर लौटें अन्यथा वेतना काटा जाएगा. लेकिन डाॅक्टर, सीएमएचओ की चेतावनी को नकारते हुए काम पर नही लौटे वहीं जिला चिकित्सालय शहडोल के क्षेत्रान्तार्ग मरीजों की स्थिति यह है कि वह काबू में नही आ रहे हैं, ऐसे में डाॅक्टर अपने मूल जिम्मेदारी को छोडकर हेड को त्यागपत्र देना दर्शाता है कि शहडोल जिला चिकित्सालय में डाॅक्टर इलाज के नाम ड्रामा खो कर रखे हैं. जो हर हाल में अपनी तुर्की चस्पा करना चाहते हैं. डाॅक्टर धर्म का पालन ने करने पर प्रदेश सरकार का दायित्व बनता है कि ऐसे गैरजिम्मेदार डाॅक्टरों को तत्काल सेवा समाप्त कर नये डाॅक्टरों की भर्ती की जाए ताकि शहडोल जिले के आसपास से आ रहे मरीजों व गर्भवतियों महिलाओं को परेशानियों का सामना न करना पडे.

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