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ग्वालियर : मंत्री प्रद्युम्न सिंह से नहीं मिली मदद, कैंसर पीड़ित ने लगाई फांसी, पुलिस ने परिजनों पर दर्ज किया केस

मध्यप्रदेश/ग्वालियर – सोमवार को मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। जहां कैंसर से पीड़ित एक वृद्ध ने शासकीय सहायता नहीं मिलने के कारण दुखी हाेकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, सेवानगर में रहने वाले बलराम शाक्य पिछले दो साल से कैंसर से पीड़ित थे। रविवार की रात उन्होंने अचानक अपने कमरें में फांसी लगा ली। सुबह जब परिजनों ने उनका दरवाजा खटखटाया तो देखा की कमरे का दरवाजा खुला था. जब परिजन अंदर पहुंचे तो हैरान रह गए। क्योंकि बलराम शाक्य ने आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने बताया कि बलराम कैंसर से पीड़ित थे। बीमारी के कारण उनके शरीर में कीड़े पड़ने लगे थे। जिससे उन्हें दर्द भी बढ़ गया था और कही से कोई मदद भी नहीं मिल रही थी। जिससे हताश होकर उन्होंने यह कदम उठाया। 

इस घटना के बाद सोमवार दोपहर करीब 12 बजे मृतक के परिजनों ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह पर मदद न करने का आरोप लगाया और उनके बंगले के बाहर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि मृतक बनवारी ने कई बार मंत्री के स्टाफ से मदद की गुहार लगाई लेकिन उसकी मुलाकात मंत्री से नहीं करने दी गई हैं। जिससे उन्होंने यह कदम उठा लिया। मृतक के बेटे का आरोप है कि उसके पिता लंबे समय से स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर से मिलकर मदद मांगने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मंत्री के स्टॉफ ने उन्हें मिलने नहीं दिया। 

वहीं, चक्काजाम की सूचना पर एसडीएम प्रदीप तोमर, पड़ाव थाना प्रभारी विवेक अस्थाना सहित अन्य अफसर मौके पर पहुंच गए। अफसराें ने रेडक्रॉस से 5 हजार रुपए की आर्थिक मदद देते हुए नगर निगम में ईडब्ल्यूएस मकान एवं शासन से आर्थिक मदद दिलाने के प्रस्ताव पर मंत्री की अनुशंसा कराने का भरोसा देकर चक्काजाम खुलवाया। लेकिन पुलिस ने रात को जाम लगाने वाले हिमांशु शुक्ला, अर्पित शुक्ला और मृतक के परिजन पर केस दर्ज कर लिया।  
बता दे कि मृतक के परिजन 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की मांग कर रहे थे।

इधर, इस पुरे मामले पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि मैं दमोह में हूं, यहीं मुझे इस दुखद घटना की जानकारी मिली। मेरा दुर्भाग्य रहा कि उनसे मेरी मुलाकात नहीं हो पाई। वैसे मैं अपने क्षेत्र में घूमकर लोगों से उनकी परेशानी पूछता हूं। अब इस परिवार के लिए जो भी संभव होगा, मदद करूंगा। 

 

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