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सरकारी आंकड़े कह रहे MP में कमजोर पड़ रहा कोरोना, पर अस्पतालों में क्यों मची है त्राहि त्राहि

सरकारी आंकड़े कह रहे MP में कमजोर पड़ रहा कोरोना, पर अस्पतालों में क्यों मची है त्राहि त्राहि

 

 

भोपाल:- बार बार मप्र के सरकारी आंकड़े इन दिनों यह बात कह रहे हैं. अस्पताल के बाहर हालात उसी तरह से हैं. ऑक्सीजन के लिए दवाओं के लिए और बेड की भारी किल्लत है. जमीनी हकीकत कुछ और है पर सरकारी आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं.

दैनिक जागरण में छपी एक रिपोर्ट की मानें तो मध्य प्रदेश में कोरोना रिकवरी रेट बढ़ने और नए केसों में कमी आने के चलते अस्पतालों पर बोझ कम होना शुरू हुआ है. राजधानी भोपाल की बात करें तो मंगलवार शाम तक शहर के 126 बड़े-छोटे अस्पतालों में 2300 से ज्यादा बेड खाली थे. इनमें नॉन ऑक्सीजन बेड की संख्या सबसे ज्यादा है. आईसीयू और एचडीयू बेड की संख्या सबसे कम.

 भोपाल में आ रहा है सुधार :-

 एक समय भोपाल में कोरोना का संक्रमण सबसे तेज था अब शहर के अस्पतालों में मंगलवार को सबसे ज्यादा 1967 आइसोलेशन बेड खाली थे. मध्य प्रदेश में बीते 1 हफ्ते क्या करें को देखें तो पता चलता है कि नए कोरोना संक्रमितों की संख्या स्थिर है, दूसरी ओर रिकवरी बढ़ी है. इसकी वज​ह से एक्टिव केस में कमी आई है. भोपाल में 30 अप्रैल को ​कोरोना के एक्टिव मरीज 13 हजार से अधिक थे, जो 4 मई को घटकर 10,000 से नीचे आ गए. मई के पहले 4 दिनों में भोपाल के 126 अस्पतालों से 7000 कोरोना मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज हुए हैं.

 

 मामलों में सुधार को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में और ज्यादा सख्ती लागू कर दी है. उनका कहना है कि जितनी ज्यादा सस्ती रहेगी संक्रमण की चेन उतनी तेजी से टूटेगी. आज से मध्य प्रदेश में 18 से ऊपर के मरीजों को वैक्सीन लगनी शुरू हुई है.

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