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कुक्षी:- निर्माण कार्य में नए प्रोजेक्ट पर सरकार कर रही खूब खर्चा, पुराने की तरफ ध्यान नहीं

कुक्षी:- निर्माण कार्य में नए प्रोजेक्ट पर सरकार कर रही खूब खर्चा, पुराने की तरफ ध्यान नहीं 

नये पर करोड़ो के साथ पुरानो पर लाखों खर्च कर भी सरकार बहते पानी को रोक सकती है 

 ग्रामीण अंचल में अनेक तालाबो ओर स्टाप डेमो को रिपेरिंग की है जरूरत 

कुक्षी/मनीष आमले :-  सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की राशि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल के स्रोत बढ़ाने के लिए खर्च करती है परंतु प्राय अक्सर देखा जाता है कि इन निर्माण कार्यों में नए निर्माण कार्यों पर तो करोड़ों रुपए खर्च हो जाते हैं और पुराने निर्माण कार्यों पर रिपेयरिंग के नाम पर कुछ लाख खर्च करने होते हैं इनकी और संबंधित विभागों का ध्यान बिल्कुल नहीं होता है जबकि पानी रोकने के लिये बनाये गये पुराने स्ट्रक्चरो ओर तालाबो को सुधारकर कम खर्च की राशि में ही अधिक पानी को बहने से रोका जा सकता है। जबकि प्रायः देखा है देखने में यह आ रहा है कि नवनिर्मित लाखों रुपए के तालाबों और स्टाप डेमो में अभी वर्तमान में भी पानी की उपलब्धता उस पर की गई राशि के अनुरूप बिल्कुल नहीं है।

सरकार की मंशा भले ही अच्छी हो परन्तु उसे फॉलो करने वालो की मंशा बिल्कुल ठीक नही दिखाई देती है ? ग्रामीण अंचलों में लाखों रुपये की लागत के पुराने तालाबो के साथ स्टाप डेमो बने हुए बड़ी संख्या में है और यह सही भी है कि मजबूत बने इन स्ट्रक्चरों की हालत अब जीर्णशीर्ण होने लगी है परन्तु इनमें से अनेक तालाबो ओर स्टाप डेमो की हालत अभी भी ठीक है थोड़ा रिपेरिंग ओर मरम्मत के साथ गहरीकरण कर दिया जाए तो इन स्ट्रक्चरों में फिर से पानी लबालब भरा दिखाई देने लगेगा।

डेहरी से बलीपुर रोड़ पर झेगदा नदी पर बना स्टाप डेम अभी इतनी खराब स्थिति में नही है ऐसा ही एक करोड़ो की लागत का स्टाप डेम बाघनी नदी पर भी बना हुआ है वही तलवाड़ा के आसपास भी ऐसे स्टाप डेम है जिन्हें अगर रिपेरिंग कर दिया जाए तो कम खर्च में अधिक पानी संग्रह करने में ये दोबारा शक्षम हो जायेगे।

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