बाजार से महंगे बीज खरीद रहे किसान, नहीं मिल रहा सरकारी बीज किसान परेशान
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मध्यप्रदेश/जबलपुर(Jabalpur) – : लॉकडाउन(Lockdown) तथा कोरोना(Corona) वायरस के कारण बीजों पर भी असर डाला है।अब किसानो का कहना है कि एक तरफ तो धान की बोनी सिर पर खड़ी है तो वहीं दूसरी और किसानों के पास बीजों की कमी है।जिस मात्रा में बीजों का उत्पादन होना था इस मात्रा में नहीं हो सका है।अब कहा जा रहा है कि बीज शासकीय एजेंसियों के माध्यम से भी तैयार नहीं हो सका है।अब समितियों के माध्यम से किसानों तक नहीं पहुंच रही धान। सर्टिफाइड बीजों की उपलब्धता ना होने के कारण प्राइवेट कंपनियों के बीज धडल्ले से अब बेचे जा रहा हैं।अब इन बीजों की ना तो कोई प्रमाणिकता है ना ही कोई गारंटी है। अब कहा जा रहा है कि जिले में आवश्यकता का करीब 60 % ही बीज किसानों को उपलब्ध हो पाया है। बाकी बीज किसानों को खुले बाजार में निजी कंपनियों के लेने पड़ रहे हैं। जबकि जिले में धान का क्षेत्रफल करीब 1 लाख 32 हजार हैक्टेयर का है।
अब धान का बीज नहीं है – :
अब जानकारी मिली है कि जबलपुर बेल्ट में कांति धान सबसे अधिक प्रचलित है ,परन्तु इसका बीज उपलब नहीं है। तैयार बीज को पहले सरकार और शासकीय समितियों को उत्पादन कर वितरण के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। लेकिन पर्याप्त मात्रा में उत्पादन ना होने के कारण किसानों तक यह नहीं पहुंच पाया है। बाजार में खुले रुप में यही बीच 4000 से लेकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल बेचा जा रहा है।
अब उड़द मूंग भी नही है – :
अब कहा जाता है उड़द व मूंग के बीज ना तो निगम के पास है,और ना तो कृषि विश्वविद्यालय के पास। इन बीजों का 8 से 10 हजार क्विंटल ही उत्पादन होने के कारण हर किसान की पहुंच से दूर है।अब किसानों को प्राइवेट कंपनियों के बीज खरीदना पड़ रहा हैं। कंपनियों ने विभिन्न ब्रांड के नाम से बाजार में 100 से लेकर 150 रुपए प्रति किलो बेच रहे है। इसी तरह मक्का के बीज भी उपलब्ध न होने के कारण बाजार में 200 रुपए से 250 रुपए प्रति किलो खरीदने को मजबूर हैं।
अब हाइब्रिड बीजों का बोल वाला है – :
किसानो का कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बीजों की शॉर्टेज जानबूझकर कर दी जाती है ताकि महंगे दामों में बेचकर मुनाफा कमाया जा सके। इन कंपनियों के बीज में ना तो कोई प्रमाणिकता होती है न ही बीजों की कोई गारंटी है।
किसानों को शासकीय बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बाजार में प्राइवेट कंपनियों के बीजों की कोई प्रमाणिकता भी नहीं है। धान की बोनी को लेकर किसान परेशान है।
राजनारायण भारद्वाज, किसान

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