MP में होना ही नहीं चाहिए चुनाव, कलेक्टर CM से सूची लेकर उम्मीदवारों को कर दें घोषित : दिग्विजय सिंह

भोपाल : शुक्रवार का दिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए राजनीति के लिहाज़ से सबसे चर्चित दिन रहा, क्योंकि कल यहां जिला पंचायत अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव था। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस-भाजपा दोनों ही दल आमने सामने रहें। लेकिन पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और मंत्री भूपेन्द्र सिंह की तकरार दिन भर चर्चा में रही। उसके बाद दिग्विजय सिंह की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई, जिसमें ये आरोप लगाए गए की उन्होंने एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ा, और उसके साथ धक्का मुक्की की।
वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा के हथकंडों पर दिग्विजय सिंह ने घोर आपत्ति जताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए। दिग्विजय सिंह ने कहा की निर्वाचन आयोग के असहायपन पर दया आती है। एमपी में चुनाव कराना ही बंद कर देना चाहिए। कलेक्टर को अधिकृत कर देना चाहिए, मुख्यमंत्री से सूची ले लें और उम्मीदवारों को घोषित कर दें।
इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचकर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, और कहा की सरकार के मंत्रियों ने सरकारी गाड़ी में झंडे लगाकर आचार संहिता का उल्लंघन किया। कलेक्ट्रेट के बाहर सुबह से कांग्रेसियों को रोका गया। भाजपा के एक विधायक को अंदर भेज दिया गया। कांग्रेस की आपत्ति के बाद ही भाजपा के विधायक को बाहर निकाला गया। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। राज्य निर्वाचन आयोग से नोटिस जारी होनी चाहिए।
इस दौरान सिंह ने बताया की जिला पंचायत चुनाव में गड़बड़ी के खिलाफ कांग्रेस इलेक्शन पिटिशन दायर करने के बाद हाई कोर्ट में भी याचिका दायर करेगी! बता दे कि मध्यप्रदेश में जनपद पंचायत के बाद जिला पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली। 51 में से 40 जिलों में भाजपा समर्थकों को जीत मिली। कांग्रेस को केवल 10 जिलों में ही जीत मिली है।




