क्या सिर्फ वित्त मंत्री से मीटिंग करके मोदी ला पाएंगे अच्छे दिन ?

देश की आर्थिक स्थिति को लेकर पूरी सरकार दुविधा में है। अर्थव्यवस्था की इतनी खराब हालत देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने सबसे पहले अपने मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यम से सलाह ली। सुब्रमण्यम ने खपत और निवेश को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा की उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय में सरकार के आर्थिक रिफॉर्म का आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ रहा है।
सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि सरकार अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए निवेश पर जोर दे रही है। गैर बैंकिंग, वित्तीय कंपनिया और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को सपोर्ट करने के लिए सरकार ने 4.47 लाख करोड़ रुपए की मदद की है।
निर्मला सीतारमण आर्थिक स्थिति को देखते हुए राहत पैकेज देने का तय किया है और कोई उम्मीद की जा रही है कि सरकार की तरफ से बड़ा ऐलान आएगा
हालांकि उन्होंने इस राहत पैकेज की कोई समय सीमा के बारे में कोई भी संभावना नहीं दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया है कि गुरुवार को उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक हुई थी और फिर मिलेंगे और अर्थव्यवस्था के बारे मैं कुछ चर्चा करेंगे।
चार हिस्सों में बांटा जा रहा है लेबल लॉ, सुब्रमण्यम का कहना है कि लेबल लॉ को चार हिस्सों में बांट दिया गया है।
सुब्रमण्यम का कहना है कि लेबर लॉ को 4 हिस्सों में बांट दिया गया है। कोड ऑफ वेजेज 2019 को अगस्त 2019 में नोटिफाई कर दिया गया है. कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशंस बिल, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड और सोशल सिक्योरिटी कोड बिल को इस साल नोटिफाई किया गया है. चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि इकोनॉमिक को मजबूत करने वाले कई कदम उठाए गए हैं। 2017-18 में कैजुअल वर्कर और फॉर्मल वर्कर्स की तादाद 5-5 फीसदी बढ़ी है।




