दमोह :जो संस्थान है ही नहीं उससे भी बनवा दी, गणवेश निर्माण घोटाले एक और सच आया सामने

दमोह :जो संस्थान है ही नहीं उससे भी बनवा दी, गणवेश निर्माण घोटाले एक और सच आया सामने

जो संस्थान है ही नहीं उससे भी बनवा दी,
गणवेश निर्माण घोटाले एक और सच आया सामने
दमोह से शंकर दुबे की रिपोर्ट : -
 स्व सहायता समूह की बजाए निजी ठेकेदार से गणवेश निर्माण कराने का मामला खुलने के बाद अब एनआरएलएम के अधिकारी का एक और झूठ सामने आया है। जिसमें उन्होंने दमोह के एक सरकारी संस्थान से काम कराने का दावा किया है। लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी ने यह कहकर पोल खोल दी कि उक्त संस्था दमोह में कार्यरत ही नहीं है। 
      सरकारी स्कूल के बच्चों को बंटने वाली करीब 10 करोड़ रुपए के गणवेश निर्माण के मामले में लगातार झूठ की परतें खुलती जा रही हैं। इस बात का खुलासा इसी बात से हो जाता है कि दूसरे विभाग के अधिकारी  एनआरएलएम के दावों की पोल खोल रहे हैं।
 दरअसल शैक्षणिक सत्र 2021-2022 के लिए करीब ढाई लाख गणवेश का निर्माण स्व सहायता समूह के माध्यम से होना था। लेकिन ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना अधिकारी ने मनमाने तरीके से यह काम निजी संस्था को सौंप दिया।  डीपीओ शिव गौतम ने मीडिया के सामने इस बात का दावा किया था कि निजी संस्थान गणवेश नहीं बना रहे हैं। बल्कि स्व सहायता समूहों को ही यह काम दिया गया है। जिसमें 3 विभागों एनआरएलएम, तेजस्विनी परियोजना और शहरी आजीविका मिशन की भागीदारी है।  इसके अलावा श्री गौतम ने यह भी कहा था कि यदि कोई निजी संस्था स्कूल गणवेश का निर्माण करते हुए पाया गया तो संबंधित अधिकारी व संबंधित संस्था के विरुद्ध वह स्वयं एफ आई आर दर्ज कराएंगे। श्री गौतम के दूसरे दावे की पोल महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रदीप राय ने खोल दी है । गणवेश निर्माण के संबंध में इस प्रतिनिधि ने उनसे जानकारी ली तो उन्होंने कैमरे के सामने खुलकर कहा कि तेजस्विनी परियोजना दमोह जिले में संचालित ही नहीं है। यह परियोजना केवल छतरपुर और टीकमगढ़ जिले में चल रही है। गणवेश निर्माण का कार्य हमारे विभाग और उससे जुड़े स्व सहायता समूह द्वारा नहीं कराया जा रहा है और न ही गणवेश निर्माण कार्य में महिला बाल विकास का कोई लेना देना है। 
 तो झूठ कौन बोल रहा है ? : -
मामले में गौरतलब है कि ग्रामीण आजीविका मिशन के डीपीओ श्री गौतम शुरू से ही झूठ बोल रहे हैं। क्योंकि जब एक निजी संस्था ने यह स्वीकार किया कि उनके यहां गणवेश निर्माण का काम हो रहा है तो श्री गौतम का पहला झूठ वही पकड़ा गया। दूसरा झूठ उनका तेजस्विनी परियोजना से कार्य कराने के संबंध में पकड़ा गया जो कि दमोह जिले में कार्यरत ही नहीं है। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी के कथन से यह बात और भी स्पष्ट हो गई कि श्री गौतम ने किस तरह गणवेश निर्माण में शासन के नियमों को ठेंगा बता कर मनमाने तरीके से करोड़ों रुपए का बंदरबांट करने की कोशिश की है।