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भोपाल निगम की बड़ी लापरवाही, 791 भवन ऐसे जो बने हुए है खतरा

भोपाल निगम की बड़ी लापरवाही, 791 भवन ऐसे जो बने हुए है खतरा

भोपाल:
बारिश के मौसम में शहर के पुराने मकानों की दीवारें और छत गिरने की घटनाएं सामने आती रहती है जिसमे कई बार लोगो के आहत होने की खबर भी आती है। लेकिन हर साल ऐसे मकानों पर कार्रवाई करने की बजाय निगम इन्हे चिन्हित करने के बाद नोटिस देने की रस्म ही अदा करता है। 

2 साल पहले 2019 में तत्कालीन निगम कमिश्नर विजय दत्ता ने जर्जर भवनों को लेकर सर्वे कराया था।‌ उस समय भोपाल में 791 भवन ऐसे पाए गए थे जिनकी स्थिति जर्जर थी और तब से लेकर अब तक सिर्फ 48 भवन ही हटाए गए है वह भी आंशिक तौर पर।

भोपाल के पुराने शहर में ऐसे मकानों की संख्या लगभग 90% है जो पूरी तरीके से जर्जर है। पुरानी और जर्जर मकानों में बारिश के दौरान दरारे पड़ जाती है जो दूर से दिखाई पड़ने लगती है ऐसे भवनों की गिरने पर मलबा सड़क पर आने से राहगीरों के चपेट में आने का ज्यादा खतरा रहता है पुराने शहर में ऐसे कई मकान है जो कभी भी गिर सकते हैं कुछ मकानों का कुछ भाग तो गिर भी चुका है बारिश के बाद जैसे ही धूप निकलती इन भवनों की दीवारें और छत गिरने लगती है।

हर साल बारिश शुरू होते ही नगर निगम को उन भवनों की याद आती है और वे उसे हटाने का नोटिस दे देते हैं लेकिन उन्हें हटाने की कार्यवाही नहीं की जाती। जिसकी वजह से वे जर्जर भवन किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।

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