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शहर की जर्जर सड़कें, हर साल मरम्मत के नाम पर 200 करोड़ रुपये होते है खर्च, लेकिन हाल जैसे के तैसे, 2 लाख से ज्यादा लोग परेशान 

भोपाल : राजधानी के उप नगर कोलार का मेन रोड सरकार के लिए सबसे बड़ा दाग बन चुका है। कोलार गेस्ट हाउस से गेहूंखेड़ा तक करीब 10 किमी का हिस्सा पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। मंदाकिनी, बीमाकुंज, थाना, ललिता नगर, नयापुरा, गेहूंखेड़ा, डी-मार्ट के सामने तो सड़क गड्‌ढों में गायब हो चुकी है। दरअसल, यहां पर सीवेज और पानी की पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस कारण पूरी सड़क खोद दी गई है। खुदाई के बाद पक्का रेस्टोरेशन (मरम्मत) नहीं की जा रही है। सिर्फ मिट्‌टी और गिट्‌टी डालकर गड्ढों को भर दिया गया है। इस कारण 2 लाख से ज्यादा लोग परेशान हो रहे हैं।

वहीं, भोपाल की खूबसूरती पर दाग बन चुकी सड़कों को लेकर CM शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी का असर अब विभागों पर दिखाई देने लगी है। CM की नाराजगी का असर यह हुआ कि नगर निगम, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य विभाग सड़कों के सुधार के लिए प्लान बनाने लगे हैं। नगर निगम अफसर जल्द टेंडर निकालने की बात कह रहे हैं। बता दें कि सड़कों की मरम्मत के नाम पर हर साल 200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। बावजूद सड़कों पर गड्‌ढों की भरमार है।

इसके अलावा पुराने शहर में पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनी को चेतावनी दी है कि 3 दिन में काम पूरा नहीं हुआ तो पैनाल्टी लगेगी। दरअसल, पुराने शहर में पाइप लाइन बिछाने के बाद बेहतर तरीके से रेस्टोरेशन नहीं किया गया। इस कारण सड़कें जर्जर हो गई है। नगर निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी ने बताया कि पुल बोगदा, ऐशबाग, भारत टॉकीज, अल्पना तिराहा, बैरसिया रोड में वॉटर सप्लाई की पाइप लाइन के शेष बचे काम को 3 दिन में पूरा करने का निर्माण कंपनी को नोटिस दिया है। काम पूरा नहीं होता है तो पैनाल्टी लगाई जाएगी। अन्य सड़कों के सुधार के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस से पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बरसों पुरानी एजेंसी CPA (राजधानी परियोजना प्रशासन) को तत्काल प्रभाव से समाप्त के निर्देश दे दिए हैं। सूत्र बताते हैं, CPA को समाप्त करने के लिए कई दिन पहले से ही स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी थी। यह भी सामने आ रहा है कि अब सीपीए का काम पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया जाएगा, क्योंकि सीपीए के अधिकांश काम निर्माण से जुड़े हैं। सरकारी भवनों का मेंटेनेंस पीडब्ल्यूडी बेहतर तरीके से कर सकता है।

वहीं, CPA का अस्तित्व समाप्त करने के ऐलान के साथ ही कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। सीपीए के प्रोजेक्ट और सड़कें अब किसके हवाले होगी, यह सवाल पैदा हो गया है। दरअसल, सीपीए ने शहर को कई ऑइकानिक प्रोजेक्ट दिए हैं, पर वह खराब सड़कों की भेंट चढ़ गया। शहरी सड़कों में सीपीए का हिस्सा 8% भी नहीं है। वर्तमान में एजेंसी के कलियासोत नदी पर 6 करोड़ रुपये का ब्रिज या जेके रोड समेत 25 प्रोजेक्ट चल रहे हैँ। इसके अलावा, 92.5 किमी सड़कों की देखरेख भी सीपीए ही करता है।

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