इंदौर: RTI लगाने वाले एक्टिविस्ट पर कलेक्टर ने दिए FIR के निर्देश, राज्य सूचना आयुक्त ने उठाए सवाल, दिग्विजय सिंह ने कहा किसने दिया कलेक्टर को अधिकार
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इंदौर: RTI लगाने वाले एक्टिविस्ट पर कलेक्टर ने दिए FIR के निर्देश, राज्य सूचना आयुक्त ने उठाए सवाल, दिग्विजय सिंह ने कहा किसने दिया कलेक्टर को अधिकार
- RTI लगाने वाले एक्टिविस्ट पर कलेक्टर ने दिए FIR के निर्देश,
- राज्य सूचना आयुक्त ने उठाए सवाल
- आयुक्त राहुल सिंह ने कहा जानकारी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर साझा करें
- पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि क्या इंदौर प्रशासन भ्रष्टाचार मुक्त हो चुका है
- जानकारी छुपाना कई तरह के खड़े कर रहा सवाल
इंदौर /गरिमा श्रीवास्तव:- राइट टू इनफार्मेशन वह माध्यम है जिसके द्वारा आप किसी भी चीज को जानने का वैधानिक अधिकार रखते हैं.यह अधिकार वह बड़ा अधिकार है जो सरकारी महकमों में किसी भी तरह की गड़बड़ियों को उजागर करने में मददगार होता है.
राइट टू इनफार्मेशन के कई बार इसके दुरुपयोग के भी मामले सामने आते रहते हैं.
राइट टू इनफार्मेशन के माध्यम से कई बार ब्लैक मेलिंग की भी घटनाएं सामने आती हैं.
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. कई विभागों के शिकायत के बाद इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने एक आरटीआई एक्टिविस्ट के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश दिए है.
एक तरफ जहां इस मामले पर सूचना आयुक्त ने सवाल उठाया तो वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भी सवाल खड़े किए. और अब इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश के गलियारों में हलचलें तेज हो गई हैं.
राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि आरटीआई एक्टिविस्ट ने ऐसी क्या जानकारी मांगी थी जिस पर एफ आई आर दर्ज कर ली गई
क्या ट्रांसफर से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए एफ आई आर दर्ज की गई है?
ट्रांसफर की जानकारी मांगना क्या ब्लैक मेलिंग है? जानकारी को सार्वजनिक करना चाहिए.
जानकारी देते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट संजय मिश्रा ने कहा है कि उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से जानकारी मांगी थी कि प्रभारी मंत्री ने जो ट्रांसफर का अनुमोदन किया था उससे संबंधित जानकारी अवलोकन के लिए दी जाए.
कलेक्टर इंदौर का कहना है कि संजय मिश्रा ने आरटीआई एक्टिविज्म के नाम पर अधिकारियों और कर्मचारियों को डरा धमका कर ब्लैकमेलिंग करने की कोशिश की.
आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि ब्लैकमेल करना अपराधिक कृत्य। कार्रवाई होनी चाहिए।
पर साथ में RTI की जिस जानकारी के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा है उस जानकारी को प्रशासनिक पारदर्शिता के मापदंड के तहत पब्लिक प्लेटफॉर्म पर डाल देना चाहिए।
क्योंकि सवाल अक्सर यह भी उठते हैं कि ब्लैकमेल किस किस्म के अधिकारी होते हैं।
इस बात से इंकार नहीं, कुछ चुनींदा लोग RTI का दुरुपयोग करते है। पर हमे नही भुलना चाहिए कि करोड़ों अरबों रुपए के घोटालो का पर्दाफाश भी इसी RTI से हुआ है। RTI देश का एकमात्र कानून, जिसके दम पर अंतिम पंक्ति का व्यक्ति बराबरी में बैठकर प्रथम पंक्ति के साहेब से हक़ से जानकारी माँगता है.
वहीं इस पूरे मामले पर आज मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि क्या इंदौर प्रशासन भ्रष्टाचार मुक्त हो चुका है?
क्या इंदौर प्रशासन केंद्र के RTI क़ानून से भी बड़ा हो गया है?
यदि कोई RTI activist किसी शासकीय अधिकारी की black mailing कर रहा है तो वह अधिकारी पुलिस में प्रमाण सहित रिपोर्ट करे.
लेकिन, ज़िला कलेक्टर को यह अधिकार किसने दे दिया है?
अब जानकारी छुपाना कई तरह के सवालों को खड़ा करता है.
राज्य सूचना आयुक्त ने जानकारी को सार्वजनिक करने की बात कही है.अगर सही तरीके से पारदर्शिता बरती जाए तो शायद ऐसे दिन ही ना देखने पड़ें.
अब आगे देखना होगा कि इस मामले पर और क्या कुछ होगा..




