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बेकाबू कोरोना : मौत का आकड़ा छुपा रही सरकार? श्मशान घाट में कम पड़ी लकड़ियां, 3 दिनों में 39 मौत

मध्यप्रदेश/भोपाल – कोरोना संक्रमण बेकाबू हो रहा हैं। हर रोज राजधानी भोपाल में 500 से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग संक्रमण रोकने से ज्यादा छुपाने पर ज़ोर लगा रहा हैं। दरअसल, बीते 3 दिनों में यहां 18 मरीज दम तोड़ चुके हैं। जानकारी के मुताबिक शनिवार और रविवार को दो बड़े निजी अस्पताल मेडिकल कॉलेजो में ही 17 मरीजों की मौत हो चुकी हैं। इस दौरान जेपी अस्पताल में 4 मरीज कोरोना के चलते दम तोड़ चुके हैं। इनको जोड़ा जाए तो बीते 3 दिन में शहर में 39 मरीजों की मौत हो चुकी हैं। लेकिन सरकारी दावों के मुताबिक हर रोज एक या दो मरीजों की मौत हो रही हैं। जबकि हकीकत कुछ और ही हैं। 

श्मशान घाट, कब्रिस्तान और अस्पताल के आंकड़े बता रहे है हकीकत 

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में रोज कोरोना से एक मौत बताते हुए आंकड़ा छुपाए जा रहे हो लेकिन श्मशान घाट, कब्रिस्तान और अस्पताल के आंकड़े हकीकत बता रहे हैं। भदभदा विश्राम घाट में सोमवार को 14 को कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार हुआ। रात में लकड़ियां कम पड़े तो दो शवों को सुभाषनगर विश्राम घाट ले जाने को कहा गया, वहां तीन कोरा मृतकों का अंतिम संस्कार हुआ। इसके अलावा झदा कब्रिस्तान में भी 2 कोरोना मरीज़ो को दफनाया गया। इस प्रकार सोमवार को ही मरने वाले 19 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। 

10 टन लकड़ियां खत्म होने की कगार पर 

विश्राम घाट के सचिव ममता शर्मा ने बताया कि लकड़ी आने की उम्मीद है तो मंगलवार से परेशानी नहीं होगी विश्राम घाट में अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ती जा रही हैं। 2 दिन पहले ही खंडवा से 10 टन लकड़ी या आई थी जो खत्म होने की कगार पर हैं। भदभदा विश्राम घाट में 10-12 दिनों से यहां सामान्य मरीज़ो की तुलना में कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार की संख्या अधिक हैं। 

सरकारी आंकड़े सटीक नहीं – मोहम्मद सुलेमान

स्वास्थ्य विभाग के एसीएस मोहम्मद सुलेमान मानते हैं कि सरकारी आंकड़े सटीक नहीं हैं। वह मानते हैं कि बुलेटिन में जो आंकड़े दिए जा रहे हैं वह सही हैं। उन्होंने माना कि अब हालत बहुत खराब हैं। पहले कोरोना अस्पतालों की संख्या कम थी अब बढे हैं। ऐसे में सभी अस्पतालों सही समय पर जानकारी एकचित्र नहीं हो पाती, जिससे आंकड़ों में अंतर होता हैं। 

समय पर नहीं मिलती जानकारी, आंकड़ों में अंतर स्वभाव  – सीएमएचओ 

इधर, सीएमएचओ डॉक्टर प्रभाकर तिवारी का कहना है कि जो आंकड़े अस्पतालों से मिलते हैं वही बुलेटिन में आते हैं। कई बार अस्पतालों से जानकारी समय पर नहीं मिलती, यही नहीं कई मरीजों दूसरों जिलों के भी होते हैं ऐसे में आंकड़ों में अंतर स्वभाव हैं। 
 

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