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मध्यप्रदेश में महिलाएं असुरक्षित, महिला आयोग वेंटिलेटर पर 

मध्यप्रदेश में महिलाएं असुरक्षित, महिला आयोग वेंटिलेटर पर 
भोपाल/राज राजेश्वरी शर्मा:  तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख यही हालात है मध्यप्रदेश के राज्य महिला आयोग के। मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षित नही है यह आज तक सिर्फ बोला जाता था लेकिन अब यह साफ नज़र भी आने लगा है। इसके प्रमाण स्वरूप हम प्रदेश के महिला आयोग को ही देख सकते हैं। महिला सशक्त हो सके इसके लिए 2016 में महिला आयोग का गठन किया गया, लेकिन राज्य महिला आयोग के अब तक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों के नियुक्ति का विवाद हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हो और पीड़ित महिलाएं सुनवाई के लिए आयोग कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो रही है। 
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि अब तो आयोग से भी न्याय की उम्मीद टूटने लगी है। ऐसे में समझा जा सकता है कि राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों में कितनी सच्चाई है। रोज़ाना एक दर्जन कंप्लेन आती है और 15 हज़ार मामले पेंडिंग है।  
16 मार्च 2020 को राज्य महिला आयोग का गठन हुआ था। उस समय में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन नियुक्ति के 1 सप्ताह के  अंदर की कांग्रेस सरकार गिर गई और बीजेपी ने सत्ता में आते ही आयोग से जुड़ी नियुक्तियां कैंसिल कर दी। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया ही विवादों में घिसते हुए हाईकोर्ट में न्याय के लिए तारीख पर तारीख, सुनवाई का इंतजार कर रही है।

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