13 साल कि बच्ची लॉकडाउन में दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार का पेट पाल रही है

गौतम कुमार की रिपोर्ट
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर रखी है। आम हो या खास सभी का बजट बिगड़ गया है। हम इंसान लॉकडाउन में कामधंधा बंद होने के चलते दाम-दाम आजिज हो गया है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से सामने आया है। जहां आठ लोगों के परिवार की जिम्मेदारी तेरह साल की मासूम मेहर जहां के कंधों पर आ गई है। मेहर जहां के पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, उसी के बाद परिवार के सामने अचानक रोजी-रोटी का संकट आन पड़ा। ऊपर से पूरे देश में लागू लॉकडाउन इस परिवार पर दुखों का पहाड़ लेकर टूट पड़ा। ऐसे में मेहर जहां सब्जी का ठेला लगाकर अपने परिवार की परवरिश की कोशिश में लगी है। मेहर की इस हिम्मत और जज्बे को पूरा जहान सलाम कर रहा है। वहीं मेहरजहां की मां सरकार से मदद की भी अपील कर रही है।
मेहरजहां का परिवार बाराबंकी की काशीराम कॉलोनी में रहता है। होश संभालने के बाद से ही मेहरजहां और उसके परिवार के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। जिंदगी में हर रोज इस मासूम के सामने एक नई चुनौती पेश कर रही है। जिससे यह पूरे साहस और हिम्मत के साथ लड़ रही है। पिता की हार्ट अटैक से मौत के बाद फिलहाल मेहरजहां के परिवार में कमाने वाला और कोई नहीं है। वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन ने भी इस परिवार के सामने कमाई के सारे रास्ते बंद कर दिये। जिसके चलते यह मासूम लड़की अब सब्जी बेचकर परिवार का गुजारा चलाने को मजबूर है। मेहर जहां आधी रात को जागकर मंडी पहुंचती है और वहां से सब्जी लाकर अपना ठेला तैयार करती है। फिर पूरा दिन ठेले पर सब्जी लादकर उसे मोहल्ले-मोहल्ले जाकर बेचती है। मेहरजहां के इस जज्बे और हौसले को देखकर हर कोई उसे सलाम कर रहा है।
मेहरजहां ने बताया कि वह रात में डेढ़ से दो के बीच सब्जी लेने मंडी पहुंच जाती है और सुबह उसे वापस आने में पांच-छह बज जाते हैं। मेहर के मुताबिक उसके पिता की मौत के बाद वह लोग स्टेशन पर सब्जी लगाते थे, लेकिन इस समय कोरोना वायरस के चलते वह सब्जी की दुकान नहीं लगा सकती। इसलिये उसे ठेले पर लेकर सब्जी मोहल्ले-मोहल्ले बेचनी पड़ती है।
वहीं मेहरजहां की मां ने बताया कि हमारे पति की मौत के बाद अब उसकी लड़कियां ही उसका सहारा हैं। उसकी पांच लड़कियां और दो लड़के हैं। पहले वह अपने पापा के साथ स्टेशन पर सब्जी बेचती थी। लेकिन उनकी मौत के बाद वह अकेले स्टेशन पर सब्जी लगाने लगी। लेकिन इस समय कोरोना की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते वह मोहल्ले-मोहल्ले ठेले से सब्जी बेचती है। मेहरजहां की मां के मुताबिक उसे अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। ऐसे में हम मदद की अपील करते हैं।




