भेल की डिप्टी ऑफिसर ने 5 महीने पहले की थी सहकर्मियों से परेशान होकर आत्महत्या,आज तक नही मिला इंसाफ

भेल की डिप्टी ऑफिसर ने 5 महीने पहले की थी सहकर्मियों से परेशान होकर आत्महत्या,आज तक नही मिला इंसाफ
आपने ऐसी लड़कियों की आत्महत्या के मामले तो जरुर सुने होंगे जो ग़रीब वर्ग की होती है या फिर जो अपने पैरों पर न खड़ी हो लेकिन ये भोपाल की नेहा का केस इसके बिल्कुल उल्टा है
क्या हुआ था नेहा के साथ
नेहा मूलरूप से भोपाल की रहने वाली थीं और भेल की हैदराबाद यूनिट से पहले भोपाल यूनिट में ही जॉब करती थीं, लेकिन शादी के बाद पति के साथ रहने के लिए उन्होंने इसी साल जून में अपना ट्रांसफर भोपाल से हैदराबाद करवा लिया था. जुलाई में भेल की हैदराबाद यूनिट में नेहा की जॉइनिंग हो गई थी, लेकिन 4 महीने बाद ही उन्होंने खुदकुशी करने का घातक कदम उठा लिया. नेहा के परिवार का कहना है कि भेल की भोपाल यूनिट से उसे सहकर्मियों द्वारा उसे प्रताड़ित करने का सिलसिला शुरू हो गया था, जिसकी शिकायत भी नेहा ने कई बार की थी. हालांकि किसी ने भी उसकी मदद नहीं की. नेहा चौकसे के सुसाइड मामले में रिश्तेदारों ने सीबीआई जांच की मांग की है. नेहा के रिश्तेदारों ने लगातार ये आरोप लगाया था कि भेल की भोपाल यूनिट से नेहा चौकसे के साथ प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हुआ था, जो भेल की हैदराबाद यूनिट में रहने तक जारी रहा. रिश्तेदारों का कहना है कि भेल की हैदराबाद यूनिट में नेहा को इतना ज़्यादा मानसिक प्रताड़ित किया गया कि वो यह दबाव 4 महीने भी नहीं झेल पाईं और सुसाइड कर लिया. सबसे बड़ा सबूत तो ये रहा कि नेहा ने अपने सुसाइड नोट में सहकर्मियों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने की बात लिखी थी. नेहा ने सुसाइड नोट में भेल के सीनियर अफसरों और उसके साथियों पर फोन हैक करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है.साथ ही नेहा ने साइबर सेल में फोन हैक किए जाने की शिकायत भी दर्ज कराई थी.
क्या वाकई नेहा का फोन होता था रिकॉर्ड?
बता दें कि नेहा की मुंहबोली बहन रीता ने बताया कि नेहा उनसे हर बात शेयर करती थीं. रीता का आरोप है कि नेहा अक्सर फोन पर उनसे बात करते हुए कहती थीं कि उसका फोन टैप हो रहा है, क्योंकि जो बातें वो घर के लोगों से करती थी, वहीं बातें उसके सहकर्मी ऑफिस में बताते थे. इसके चलते उनको हमेशा इस बात का डर रहता था कि उनकी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है. रीता के मुताबिक नेहा ने हैदराबाद जाकर भी अपने सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी. नेहा 18 अक्टूबर को भोपाल आने वाली थीं, लेकिन उन्होंने 17 अक्टूबर को ही खुदकुशी कर ली. जरा सोचिए जब एक अच्छे पोस्ट पर काम कर रही सरकारी अफसर को मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर खुदकुशी करनी पड़ गयी और इतने महीनों के बाद भी आज तक उसे इंसाफ नही मिला तो जो लड़कियां आम परिवार और ग़रीब तबकों से आती है उनकी बाते तो कोसो दूर मिट्टी में दफन कर दी जाती होंगी और इंसाफ नाम का शब्द उनके परिवार के लिए महज़ एक किताबी भाषा लगती होगी आखिर प्रदेश सरकार को नेहा के इस दर्द का एहसास कब होगा इसके लिए तो आपको और नेहा के परिवार को कब तक इंतजार करना पड़ेगा इसकी कोई समय सीमा नही है।




