"4G वाली आजादी" कश्मीर के मौजूदा स्थिति पर द लोकनीति के संपादक आदित्य सिंह का लेख।

दिल्ली की दो कौड़ी की मीडिया आपको कश्मीर पर ख़बरें क्यों नहीं दिखा रही है? क्योंकि उसे पता है कि आप ख़बर किसे समझते हैं, वो भ्रामक जानकारी जिसमें आपको संतुष्टि मिले वही अब आपके लिये ख़बर बन चुकी है। आपके दिमाग में कम्यूनल और फर्जी राष्ट्रवाद का कचरा डाल कर मीडिया आपको कश्मीर से संबंधित हर ख़बर ऐसे परोस रही है, जैसे पूरा कश्मीर प्रो पाकिस्तानी हो और जो कुछ हो रहा है सिर्फ वही होना चाहिये।
आप जिस इंटरनेट के ज़रिए आबाद हुए जा रहे हैं, वही इन्टरनेट वहां पर सुरक्षा के नाम पर 6 महीने से बंद है, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार और उसके जनसंपर्क तंत्रों ने पूरे देश को ये बताया कि 2G इंटरनेट चालू कर दिया गया है, जो बिल्कुल झूठ था। इस बात की पुष्टि रविशंकर प्रसाद ने ही राज्यसभा में कर दी। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के प्रश्न पर अपनी बात रखते हुए रविशंकर प्रसाद जो बात कह रहे हैं उसे समझना भी महत्वपूर्ण है, और समझना ही पड़ेगा, आज नहीं समझेंगे तो कुछ दिन बाद सही, लेकिन समझे बगैर काम नहीं चलने वाला।
आप मॉडल नहीं समझ रहे हैं! प्रधानमंत्री से लेकर तमाम मंत्रीयों और प्रवक्ताओं तक की भाषा और शब्दों पर गौर कीजिये, कश्मीर के सन्दर्भ में कुछ शब्द तय किये गये हैं और बोला जाने वाला सबकुछ उन्हीं शब्दों के इर्द-गिर्द बुना जा रहा है। रविशंकर प्रसाद के जवाब में राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र था, जो प्रधानमंत्री के हर उस वक्तव्य में मिल जायेगा जो कश्मीर से संबंधित है, यही भाषा प्रवक्ताओं की भी है और यही गोदी मीडिया की। क्योंकि सरकार और उनके चाटुकारों को इस बात की पक्की जानकारी है कि हिंदी भाषी क्षेत्र के लोगों का सर्वस्व, राष्ट्र और धर्म के नाम पर लूटा जा सकता है। कश्मीर टाइम्स ने फ्रंट पेज पर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के प्रश्न पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के जवाब को हूबहू जगह दी है। क्या कभी दिल्ली की मीडिया या हिन्दी अखबारों ने कश्मीर के नेताओं की बात को फ्रंट पेज पर जगह दी है? याद कीजिये! खैर ख़बर के अनुसार रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उनकी सरकार ने 783 व्हाइट लिस्ट वेबसाइट को बहाल किया है, जिनमें मुख्य तौर पर ई – कॉमर्स, सरकारी, बैंकिंग और एजुकेशन से जुड़ी वेबसाइट्स शामिल हैं, रविशंकर प्रसाद ने ये भी बताया कि कश्मीर और लद्दाख में वॉयस, एसएमएस और लैंडलाइन सेवाओं को बहाल कर दिया गया है, जबकि ब्रॉडबैंड सेवाओं को जम्मू क्षेत्र में बहाल किया गया है। इस पूरे जवाब में 2G इंटेरनेट का कोई जिक्र नहीं था, तो सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 2G इन्टरनेट के नाम पर जो ख़बरें चलाई गईं वो आप यानी हिंदी पाठकों और दर्शकों के साथ एक बहुत बड़ा धोखा था।
रविशंकर प्रसाद कानून के जानकार हैं, वकील हैं इसी जवाब में उन्होंने कश्मीर में इंटरनेट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणीयों का खड़े – खड़े मतलब भी निकाल दिया और कह भी दिया कि “भले सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट के जरिये अपनी बात रखने को अभिव्यक्त की आजादी माना हो, लेकिन “रिजनेबल रिस्ट्रिक्स्न” भी महत्वपूर्ण है। शायद सुप्रीम कोर्ट को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के बारे मे न पता हो! या रविशंकर प्रसाद एक नई थ्योरी को जन्म देने का प्रयास कर रहे हों, जिसके अनुसार “रिजनेबल रिस्ट्रिक्स्न” को मेनटेन करने के लिये अभिव्यक्ति की आजादी को छीना जा सकता है! खैर ये शब्द भी तय किया हुआ शब्द है, जब-जब संविधान को तिलांजलि दि जाये और लोग प्रश्न करें तो बोल दो “रिजनेबल”, CAA में भी “रिजनेबल क्लासिफिकेशन” जुमला खूब चलाया गया। खैर जाते – जाते ये कहना न भूले कि “कश्मीरी बहुत खुश हैं।”
आज की ही ख़बर है, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को PSA यानी पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट में बुक किया गया है, अभी तक इनको बंद रखा तो गया था लेकिन बिना किसी चार्ज के। ये दोनों नेता जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं और दोनों नेताओं के पार्टियों के साथ बीजेपी ने केंद्र और राज्य में सरकारें चलाईं हैं।

सवाल यह है कि, लोकतंत्र में एक क्षेत्र के लोगों के बोलने के सभी मंचों को हाईजैक करके और उनके प्रतिनिधियों को जेल में डालकर, केंद्रीय मंत्री उच्च सदन में ये कहते हैं कि वहां सब सही है, और लोकतंत्र का रखवाला हमारा उच्च सदन इसे सहज स्वीकार कर लेता है। मीडिया चूं तक नहीं करती और आप ( हिंदी भाषी लोग) इसे अपने राष्ट्र का गौरव कहते हैं ! क्या यही है आपके राष्ट्रवाद की परिभाषा? आपको बोलना होगा, आपके बोलने पर सबकुछ सही हो जायेगा, आप सवाल तो कीजिये, अपने विवेक का ईस्तेमाल कीजिये, पूछिये कि जब सारा आतंकवाद नोटबंदी के बाद ध्वस्त हो गया था तो ये क्या चल रहा है?
कोई आतंकवाद नहीं है भाई, बस हव्वा खड़ा किया जा रहा है उन्हें पता है कि आप इसे वीरता समझते हैं, उन्हें पता है कि आप एक धर्म से नफरत करने लगे हैं इसलिए इसमें आप खुश रहेंगे, और इसी के नाम पर 2022 का यूपी वाला चुनाव लड़ा जायेगा, बहुत बेरोजगारी है भाई, आप खुद देख लो, आप क्या करने लायक हो और क्या कर रहे हो ? अर्थव्यवस्था चौपट है, बाबू जी किसान हैं, तो उनका हाल देखो, क्योंकि वादा तो इसीका था। अब जब ये सब कुछ नहीं हुआ तो आज 6 साल से आपको ऐसे ही तमाम मुद्दों के इर्द-गिर्द उलझाया जा रहा है, इसलिये कह रहा था आप मॉडल समझिए!
(कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और सभी कश्मीरी हमारे भाई-बहन)




