महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों का दर्द आख़िर क्यों भूल गए महाराज??

महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों का दर्द आख़िर क्यों भूल गए महाराज??

मध्यप्रदेश/भोपाल - सूबे के सरकारी कॉलेजों में पिछले दो दशकों से अध्यापनरत अतिथिविद्वान अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए कई वर्षों से अपने नियमितीकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूरे वर्ष सत्ता के गलियारों में महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण का मुद्दा छाया रहा। कांग्रेस सरकार में अतिथिविद्वानों के मुद्दे पर महाराज सिंधिया की बगावत व उसके बाद कांग्रेस सरकार के ताबूत में अतिथिविद्वान नियमितीकरण आखरी कील साबित हुआ। मोर्चा के संयोजक व महासंघ के अध्यक्ष डॉ देवराज सिंह का कहना है कि इसी अतिथि विद्वान नियमितीकरण के मुद्दे पर मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का पतन हुआ व शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, लेकिन सत्ता के केंद्र पर रहे इस चर्चित मुद्दे पर वर्तमान शिवराज सरकार एक भी कदम अभी तक आगे नही बढ़ी है। संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता डॉ मंसूर अली ने कहा है कि शाहजाहानी पार्क भोपाल में अतिथि विद्वानों का आंदोलन कई महीने तक चला जो मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन साबित हुआ और इसी आंदोलन ने सत्ता की जड़ों को हिलाकर रख दिया।

इस आंदोलन में सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान सहित सभी वर्तमान कैबिनेट मंत्री तक आये और अतिथिविद्वान नियमितीकरण को जायज़ ठहराया किन्तु सत्ता में आते ही पता नही क्यों इनके सुर बदल गए।जो भी हो किन्तु अतिथिविद्वानों के मुद्दे पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया अब तक कोरा चुनावी वादा ही साबित हुआ है।यहां तक कि अतिथि विद्वानों की दुर्दशा से द्रवित होकर राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की धमकी दे डाली थी किन्तु यह विडंबना ही है कि राज्यसभा सांसद बनते ही उन्होंने भी रहस्यमयी मौन धारण कर लिया है। जो भी हो इतने संघर्षों के बाद भी अतिथि विद्वानों के हाथ अब भी खाली।

एक वर्ष से कैबिनेट से पास 450 पदों में भर्ती प्रक्रिया शुरू ना होना दुर्भाग्यपूर्ण

संघ के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए शासन प्रशासन से अनुरोध किया है कि आज एक वर्ष से ज्यादा समय से 450 पदों की कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी थी लेकिन आज तक उन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू ना हो पाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है,सरकार एक वर्ष से बाहर हुए लगभग 500 अतिथि विद्वानों को सेवा में नहीं ले पाई है।डॉ पांडेय ने शासन प्रशासन से विनम्र प्रार्थना करते हुए कहा कि सेवा से बाहर हुए व बेरोज़गारी का दंश झेल रहे अतिथि विद्वानों को तत्काल व्यवस्था में लें जिससे लगातार अतिथि विद्वानों की होती आत्महत्या रुके और एक सुकून भरी जिंदगी जी पाए।आज हजारों परिवार बेहाल हैं बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

अतिथि विद्वान नियमितीकरण के मुद्दे पर बनी शिवराज सरकार आखिर क्यों कर रही है नियमितीकरण में अनावश्यक विलंब

अतिथि विद्वान डॉ जेपीएस चौहान ने बताया कि दुर्भाग्य है कि अपनी पूरी जिंदगी उच्च शिक्षा में लगा देने वाले,पिछले 26 वर्षों से उच्च शिक्षा की सेवा करने वाले सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अतिथि विद्वानों को ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे कभी सोचा नहीं था,अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण मुद्दे पर ही शिवराज सरकार बनी लेकिन दुर्भाग्य की बात है अभी तक नियमितीकरण की तरफ़ एक भी कदम सरकार ने नहीं उठाया है जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।सरकार से विनम्र प्रार्थना है तत्काल बाहर हुए अतिथि विद्वानों को व्यवस्था में लेते हुए नियमित करें।