पेगासस स्पाईवेयर का कौन जिम्मेदार? पीएम मोदी कराएं इसकी जांच 

पेगासस स्पाईवेयर का कौन जिम्मेदार? पीएम मोदी कराएं इसकी जांच 

पेगासस सॉफ्टवेयर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है| इस सॉफ्टवेयर के जरिये मीडियकर्मियों, नेताओं और कई सारी बड़ी हस्तियों के डेटा की जासूसी करने की बात सामने आ रही है| सवाल यह उठ रहा है कि पेगासस, जिसे पेगासस प्रोजेक्ट, पेगासस सॉफ्टवेयर, मैलवेयर और स्पाइवेयर के साथ अटैच करते हुए इसकी चर्चा की जा रही| 

आखिर ये पेगासस क्या है?
पेगासस एक मैलवेयर या सॉफ्टवेयर है जो आईफोन और एंड्राइड उपकरणों को प्रभावित करता है| यह अपने उपयोगकतार्ओं को मेसेजस,फोटो और ईमेल खींचने, कॉल रिकॉर्ड करने और माइक्रोफोन सक्रिय करने की अनुमति देता है| दरहसल, पेगासस को इसराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ने तैयार किया है और कई सारे देशो ने स्पाइवेयर ख़रीदा भी है| हालांकि इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठाए गए है, और पहले भी यह विवादित चर्चा में रहे चूका है| सिर्फ यह ही नहीं बल्कि व्हाट्सऐप फेसबुक जैसी अन्य कंपनियों ने तो इस्पे मुक़दमे भी दर्ज किए हैं| 

द वायर ने साझा की रिपोर्ट 
भारत की तरफ से न्यूज पोर्टल द वायर को आंकड़ों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है| द वायर ने रविवार रात जासूसी से संबंधित एक रिपोर्ट साझा की, जिसमें मीडिया की कई बड़ी हस्तियां शामिल हैं। 

द वायर के साथ दैनिक भास्कर की खास बात-चीत| 
बता दें की एक निजी  मीडिया हाउस दैनिक भास्कर ने द वायर के फाउंडर सिद्धार्थ वरदराजन के साथ इंटरव्यू किया| वरदराजन ने इंटरव्यू में बताया की इस रिपोर्ट में अपना और अपने सहयोगियों और अन्य लोगों का नाम सामने आने पर वो हैरान हैं| उन्होंने कहा की पत्रकारों की जासूसी मीडिया की आजादी पर हमला करना है| उन्होंने ये भी कहा की यह रिपोर्ट नहीं है, बल्कि फोन नंबर्स का एक डेटाबेस है सभी मीडिया ग्रुप जिनके पास यह डेटा था, उन्होंने साथ मिलकर इन आंकड़ों को वेरिफाई करने का काम किया। जिन लोगों के फोन नंबर्स इसमें शामिल थे, उनसे बात की। हमने कोशिश की कि उनके फोन (इंस्ट्रूमेंट्स ) का फोरेंसिक टेस्ट किया जाए।

खुद पर निगरानी को लेकर हैरान हुए द वायर के फाउंडर 
वरदराजन ने बताया कि कई समय से ऐसा लग रहा था की मेरे फ़ोन पर निगरानी रखी जा रही है मतलब मुझे ऐसा लगता था कि मेरा फोन निगरानी में है, लेकिन टेक्निकल कंफर्मेशन आने के बाद सब कुछ चौंका देने वाला है।

40 पत्रकारों के नाम आए सामने लेकिन लिस्ट हो सकती है और भी लम्बी 
उन्होंने कहा की पत्रकारों पर निगरानी रखना मतलब उनसे उनकी आजादी छीनने जैसा है| इसके पीछे का मकसद कुछ खास स्टोरीज की पड़ताल होने और उन्हें पब्लिश होने से रोकना है। हमारे पास तो सिर्फ 40 लोगो की लिस्ट है असलियत में तो ये इससे भी बड़ी होगी| साथ ही उन्होंने ये भी कहा की इस हफ्ते हम रोजाना नई जानकारी डिटेल के साथ पब्लिश करंगे| 
 
क्या सरकार अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा रही है? 
उन्होंने कहा की एनएसओ अपना प्रोडक्ट पेगासस सिर्फ सरकारों को बेचता है। भारत सरकार ने पेगासस के इस्तेमाल से मनाही नहीं की है। इसलिए यह मानना तार्किक है कि भारत सरकार द्वारा पेगासस का इस्तेमाल पत्रकारों, विपक्षी नेताओं सहित अन्य लोगों की जासूसी के लिए किया जा रहा है। अगर ऐसा किसी दूसरे देश की सरकार की तरफ से किया जा रहा है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इसकी जांच करवाने के सभी कारण मौजूद हैं। आखिर वो कौन सी विदेशी सरकार है जो भारतीय मंत्रियों, न्यायाधीशों, चुनाव आयुक्तों, अधिकारियों और पत्रकारों की जासूसी करवा रही है। निश्चित तौर पर इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।