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ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव का किया बहिष्कार: गांव के बाहर लगाए ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के पोस्टर

नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश में चुनाव आते ही नेता जनता को लुभाने के लिए कई तरह की कवायद कर रहे हैं। लेकिन जनता भी अब समझदार हो चली हैं। अब लोग लुभाने बातों से नहीं बल्कि विकास पूरा करने पर नेताओं को चुनावी सरताज पहनाएंगे। ऐसा ही एक मामला नर्मदापुरम जिले के इटारसी के वनग्राम साकई और झालई का सामने आया है। जहाँ 6 सालों से विस्थापित आदिवासी परिवार प्रशासन ने सड़क की मांग कर रहे हैं। जिसके चलते आदिवासी परिवारों ने दोनों ग्राम के बाहर “रोड नहीं तो वोट नहीं” के बैनर-पोस्टर लगा दिए हैं। बता दें कि 6 साल पहले सतपुड़ा टाइगर रिजर्व सोहागपुर ब्लॉक से करीब 150 आदिवासी परिवारों को जंगल से निकालकर इटारसी के जमानी में विस्थापित किया गया था। जमानी के पास सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा साकई और झालई वनग्राम विस्थापित किया गया था। छह सालों में वन विभाग ने आदिवासियों को जगह मकान तो दे दिए, लेकिन सड़क का निर्माण अभी तक नहीं कराया।

ग्रामीणों को 7 किलोमीटर की कच्ची सड़क पर कई कठनाईयों का सामना कर आवगमन करना पड़ रहा है। बारिश में सड़क की यह स्थिति हो जाती है कि कई दिनों तक इस सड़क पर चलना बहुत मुश्किल होता है। इसके बाद भी सड़क का निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा है। गांव में कोई गंभीर बीमार हो जाए तो एम्बुलेंस का ड्राइवर भी गांव में आने से मना कर देते हैं। सभी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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