मप्र नगरीय निकाय चुनाव : इस दिन हो सकता है तारीखों का ऐलान, प्रदेश में हलचल तेज़

मध्यप्रदेश/भोपाल – मध्यप्रदेश में होने जा रहे 407 नगरीय निकायों के लिए फाइनल वोटर लिस्ट 3 मार्च को जारी की जा चुकी हैं। अब सिर्फ आचार संहिता लागू करने का फैसला लिया जाना बाकि हैं। निर्वाचन आयोग सूत्रों का कहना है कि, आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए होने वाले मतदान सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। इसमें आरक्षण से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा चुका हैं। आयुक्त बीपी सिंह चुनाव की तैयारियों को लेकर 6 मार्च को शाम 4 से 5.30 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर्स से चर्चा करेंगे। इसके बाद प्रेस कांफ्रेस करते हुए चुनावी तारीखों का ऐलान किया जाएगा।
कहा जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकाय चुनाव 2 चरण और पंचायत चुनाव 3 चरण में कराने की तैयारी की हैं। संभावना है कि दोनों चुनाव एक साथ कराए जाएंगे। काेरोना संक्रमण के चलते इस बार वोटिंग का समय 1 घंटा बढ़ाया जा रहा है। यानी वोटिंग सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होगी।
याद हो कि, इतना ही समय मध्य प्रदेश में हालही में गुजरे उपचुनाव के दौरान भी बढ़ाया गया था। यानी इस बार मतदान का समय सुबह 7 बजे से शुरु होगा, जो शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। खास बात ये है कि नगरीय निकाय चुनाव में नगर निगम महापौर, नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष एवं पार्षद तथा पंचायत निर्वाचन में जिला पंचायत सदस्य और जनपद पंचायत सदस्य के लिए मतदान ईवीएम से होगा। सरपंच और पंच के लिए मतदान मतपत्र के माध्यम से होगा।
बता दे कि इस बार नगरीय निकाय चुनाव में नई नगर सरकार तय करने के लिए 18 लाख 56 हजार 648 वोटर्स वोट डालेंगे। इनमें 9 लाख 64 हजार 402 पुरुष, 8 लाख 92 हजार 51 महिला और अन्य में 195 मतदाता शामिल हैं। फाइनल लिस्ट में करीब 15 हजार नाम काटे गए हैं। इनमें मृतक, एक वार्ड से दूसरे में शिफ्ट हुए वोटर्स, नामों में गड़बड़ी वाले मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा करीब 4500 नए वोटर्स के नाम भी जोड़े गए हैं।
1 साल से भी ज्यादा समय से चल रहा है प्रशासकीय कार्यकाल
गौरतलब है की पिछले एक साल से भी अधिक समय से मध्य प्रदेश के नगर निगम और परिषदों का प्रशासकीय कार्यकाल चल रहा हैं। कोरोना के चलते ही लगातार ये अवधि बढ़ाई जाती रही हैं। सबसे पहले कमलनाथ सरकार के दौरान चुनावी तारीखों को टाला गया था। इसके बाद जारी शिवराज सरकार भी इसे आगे बढ़ाने पर ही नजर आई। सरकार के पिछले आदेश में चुनावी व्यवस्था को तीन महीने और आगे बढ़ाने पर फैसला लिया गया था। हालांकि, इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसपर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए जल्द से जल्द चुनाव कराने के आदेश दे दिये, जिसके चलते चुनावी व्यवस्था की जा रही हैं।




