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जबलपुर में दो साल का मासूम सबग्लोटिक स्टेनोसिस जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित, ऑपरेशन के लिए चाहिए 12 लाख रुपए,लोगों से मदद की गुहार

  • दो साल का मासूम दुर्लभ बीमारी से हैं पीड़ित
  • नहीं ले सकता नाक और मुंह से सांस
  • बीमारी के इलाज़ में 12 लाख का ख़र्चा
  • पराठे का ठेला लगाते हैं मासूम के पिता
  • लोगों से की मदद के लिए गुहार

जबलपुर/अंजली कुशवाह: आज के आधुनिक समय में बहुत सी दुर्लभ बीमारियों ने जन्म ले लिया हैं. ऐसी ही एक दुर्लभ बीमारी से जबलपुर में दो साल का मासूम पीड़ित हैं. इस दुर्लभ बीमारी का नाम हैं सबग्लोटिक स्टेनोसिस. गले में होने वाली इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित मासूम गले के नीचे छेद कर नली की मदद से सांस ले पाता है. सामान्य बच्चों की तरह यह मासूम बच्चा नाक और मुंह से सांस लेने में असमर्थ है. जिसके कारण मासूम हर 10-15 दिन में बीमार हो जाता है. इस दुर्लभ बीमारी के इलाज में 12 लाख रुपए खर्च होंगे, लेकिन मासूम के इलाज में पहले ही काफी ख़र्चा कर चुके इस परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं. बच्चे के पिता ने लोगों से मदद की गुहार की है.

क्या हैं ये दुर्लभ बीमारी

जबलपुर के संजय नगर अधारताल निवासी आकाश वथाव के दो बेटों हैं. लेकिन छोटा बेटा रुद्रांश वथाव सबग्लोटिक स्टेनोसिस नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है. इस बीमारी में रुद्रांश के सांस की नली बाधित हो जाती है. जिसके कारण वह सामान्य बच्चों की तरह मुंह और नाक से सांस नहीं ले पाता और न ही  मासूम बोल पाता है.

12 लाख रुपए का इंतज़ाम करने असमर्थ परिवार

मुंबई में इलाज के लिए रुद्रांश के पिता ने नारायण हेल्थ उपक्रम के हॉस्पिटल एसआरसी में बात की है. डॉक्टरों ने इलाज में 12 लाख रुपए का खर्च बताया है. रुद्रांश के पिता तीन कोचिंग में पढ़ाकर महीने में 9 हजार रुपए कमाते हैं. इसके अलावा दिन में पराठे का ठेला लगाकर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करते हैं. इस रकम की व्यवस्था करना उनके बस की बात नहीं है.

जन्म से ही जिंदगी के लिए जंग लड़ रहा मासूम

पिता आकाश वथाव के मुताबिक, दो साल पहले रुद्रांश पैदा हुआ. 24 घंटे में ही उसके हाथ-पैर नीले पड़ गए. जांच हुई तो पता चला कि उसके दिल में छेद है. एंबुलेंस से उसे मुंबई लेकर गए. वहां 45 दिन तक वह वेंटीलेटर सपोर्ट पर रहा.दिल का छेद तो भर गया, लेकिन उसकी सांस की नली अवरुद्ध हो गई. मेडिकल की भाषा में वह दुर्लभ सबग्लोटिक स्टेनोसिस नाम की बीमारी की चपेट में आ गया. सांस नली बंद होने के चलते उसकी आवाज भी बंद हो गई है.

मदद के लिए लगायी लोगों से गुहार

मिली जानकारी के अनुसार रुद्रांश वथाव सबग्लोटिक स्टेनोसिस बीमारी के कारण हर 10 से 15 दिनों में सर्दी-जुकाम और वायरल की चपेट में आ जाता है. पिता संजय के मुताबिक वह भी अपने लाल को और बच्चों की तरह खेलते-कूदते देखना चाहते हैं. मां संध्या के मुताबिक, मेरा लाल पैदा होने के बाद से ही दर्द झेल रहा है. दो साल हो गए। 12 लाख रुपए का इंतजाम नहीं हो पाया. मासूम की इस दुर्लभ बीमारी का इलाज कराते-कराते आर्थिक रूप से टूट चुके इस दंपती ने लोगों से मदद की गुहार लगाई है. अगर आप में से कोई भी इस मासूम की मदद करना चाहता हैं तो इन नंबरों  8871332635 या 7000653316 पर संपर्क कर सकता है.

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