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बीमार सिस्टम सुधर नहीं रहा, शहडोल में 17 दिन में 23 बच्चों की मौत

बीमार सिस्टम सुधर नहीं रहा, शहडोल में 17 दिन में 23 बच्चों की मौत

शहडोल/गरिमा श्रीवास्तव:-शहडोल जिले के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है.यह थमने का नाम नहीं ले रहा. शहडोल के सरकारी ज़िला अस्पताल में सत्रह दिन में 23 बच्चों की मौत हो गई. मुख्यमंत्री डॉ प्रभु राम चौधरी के जाने का भी कोई असर नहीं हुआ, रविवार को दो बार बच्चों की मौत हुई है. एक बच्ची की इलाज के बाद स्वस्थ हो जाने के बाद मौत हो गई.

जानकारी के अनुसार बच्ची कल  अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाली थी. लेकिन देर रात बच्ची की सांस नली में दूध फंस गया. जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. 
 इन दिनों अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से बच्चों की लगातार मौत हो रही है. उमरिया जिले के सेमरिहा निवासी किसन बैगा की 3 महीने की बच्ची की मौत हो गई. परिजन बाइक से उसे अस्पताल लें गए थे. जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

 पीड़ित परिवार ने बताया कि बच्ची को बाइक से अस्पताल ले जाना पड़ा. अस्पताल द्वारा समय पर एंबुलेंस नहीं मुहैया कराया गया..
सतना में भी बच्चों के मौत का सिलसिला जारी :- 

यूं तो प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था दुरूस्त करने के नाम पर जितना कुछ शासकीय कोष से बहा चुकी है, उसके लिहाज से वर्तमान में स्वास्थ्य व्यवस्था सबसे मजबूत स्थिति में होना चाहिए था. अपितु हुआ उल्टा है मप्र की स्वास्थ्य व्यवस्था सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया है. क्योंकि जिनके कंधों में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर करने का बोझ है, वही अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं. 
गौर तलब है कि शहडोल जिला चिकित्सालय में 18 मासूम बच्चों की मांओं की चीख थमा नहीं था कि अब सतना जिला चिकित्सालय में 11 दिन में 9 मासूमों ने दम तोड दिया. जिस तरह मप्र की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर है उसके मुताबिक जनता को अपने जेब का वजन बढ़ाना होगा. और जीवन चाहिए तो निजी अस्पतालों की ओर रूख करना होगा. क्योंकि स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक करने के नाम प्रदेश सरकार के कारिन्दे अपनी जेबे भर रहे हैं. जिस तरह सतना जिला चिकित्सालय से भयावह हालात सामने आए हैं वह घोर लापरवाही का प्रमाण है. जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में 11 दिन के भीतर 9 नवजातों ने दम तोड दिया है. जिसमें 4 बच्चें इन बार्न और 5 आउट बर्न यूनिट में भर्ती थे बच्चों की मौत का ग्राफ बढने पर शुक्रवार की सुबह स्वास्थ्य अधिकारियों ने आनन-फानन में समीक्षा बैठक बुलाइ और डेथ ऑडिट करने के लिए बीएमओ को जिम्मा सौंपा. जिन 9 नवजातों की मौत हुई वह एक माह से भी कम हैं. चिकित्सक बच्चों की मौत की वजह पीपीएच सेप्सिस एक्स लेप्सिया सहित अन्य बीमारियों से पीडित होना बता रहे हैं. और इससे पहले नवंबर माह में 40 मासूमों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा

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