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बड़ी धांधली:-कोरोना की आड़ में ठेकेदारों को किया गया 362 करोड का अधिक भुगतान

कोरोना की आड़ में ठेकेदारों को किया गया 362 करोड का अधिक भुगतान

मध्यप्रदेश में कोरोना में कई धांधली सामने आई है. कभी कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा छुपाया गया है तो अब यह बड़ा खुलासा हुआ है कि कोरोना की आड़ में 362 करोड़ का ज़्यादा पेमेंट किया गया है.

  प्रदेश में बीते साल कोरोना की आड़ में ठेकेदारों को 362 करोड़ का अधिक भुगतान 54 करोड़ का अनियमित भुगतान और एक करोड़ का गबन किए जाने का खुलासा वित्त विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है.

जब स्थानीय निकायों के ऑडिट कराए गए तो यह बड़ी गड़बड़ियां सामने आए. प्रदेश में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई यह बड़ा सवाल उठता है.

और इस बड़ी धांधली के पीछे किसका हाथ है.??

 अब इस मामले में संबंधित नगरीय प्रशासन विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं. प्रदेश में पिछले साल 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2020 के बीच 16 नगर निगम.. 33 नगर पालिकाओं,…..6 विकास प्राधिकरणो,….25 कृषि उपज मंडी समितियों,11 विश्वविद्यालयों,5 महाविद्यालयों सहित 105 संस्थाओं में किए गए ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि इन संस्थाओं ने 362 करोड रुपए का अधिक भुगतान ठेकेदारों को कर दिया है..

इसके साथ ही ₹54करोड़ 66 लाख का अनियमित भुगतान भी हुआ है.. करीब 44लाख रुपए का दोहरा भुगतान किया गया है. इससे सरकार को करीब ₹33 करोड़ 33 लाख रूपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई.

बीते दिनों निर्माण कार्यों में अनियमितताएं अक्सर देखने को मिली. अनियमितता के चलते करीब 62 करोड ₹8लाख का अनियमित भुगतान किए जाने का खुलासा हुआ है तो स्थानीय निकायों में किए गए ऑडिट में पकड़ी गई है. गड़बड़ियों के प्रतिवेदन संबंधित संस्थाओं को भेज दिए गए..

अधिक भुगतान के मामले में लगभग 21करोड़ की वसूली निकालो ने ठेकेदारों से कर ली है.एक तरफ जहां मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव होने हैं तो वहीं दूसरी तरफ नगरीय निकायों का यह बड़ा कारनामा सामने आया. आखिर यह 54 करोड का अनियमित भुगतान और एक करोड़ का गबन कैसे हुआ.??

वित्त मंत्री भी बड़े खुलासे के बाद कुछ नहीं बोल रहे हैं. स्थानीय अखबार पीपुल्स समाचार में जब वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से चर्चा करनी चाही तो उन्होंने फोन भी रिसीव नहीं किया.

 मध्यप्रदेश में धांधली के ऐसे बड़े मामले अक्सर सामने आ रहे हैं.

एक तरफ जहां या बड़ी धांधली हुई है तो दूसरी तरफ यह बात भी सामने आई है कि नगर निगम ने वर्तमान में ठेकेदारों का करीब 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का पेमेंट रोक रखा है. जिसकी वजह से ठेकेदारों ने काम करने से मना कर दिया है और भोपाल में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है. कुछ चुनिंदा बड़े प्रोजेक्ट को छोड़कर बात करें तो छोटे-छोटे विकास कार्य रुके हैं.

 सरकार चुप है कोई कुछ भी नहीं बोल रहा है. जिम्मेदार किसी भी तरह के सवाल के जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं.

एक तरफ जहां सरकार हर विभाग में ट्रांसपेरेंसी की बात कहती है तो वही इस तरह की बड़ी मामले सामने आ रही है. जाने यह कैसी ट्रांसपेरेंसी है 

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