बैकफुट पर प्रदेश सरकार, लिया ये आदेश वापस, साध्वी प्रज्ञा ने भी जताया था इसका विरोध

भोपाल/खाईद जौहर – पशुपालन विभाग की तरफ से 29 सितंबर 2021 को जिलों को आदेश जारी किए थे कि निकृष्ट (अनुपयोगी) सांडों की नसबंदी करना सुनिश्चित किया जाए। आदेश में 4 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक नसबंदी अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जैसे ही इस आदेश के बाद मामला गरमाया तो प्रदेश सरकार बैकफुट पर आ गई है। सरकार ने विरोध के 24 घंटे के अंदर नसंबदी के आदेश को वापस ले लिया है। इस संबंध में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. आरके मेहिया ने बुधवार को आदेश जारी किया।
सांसद साध्वी प्रज्ञा ने भी किया था इस आदेश का विरोध
दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ने इसे प्रक्रति के साथ खिलवाड़ बताया था, और कहा था कि यदि देसी सांडों की नसबंदी की गई तो नस्ल ही खत्म हो जाएगी। इस संबंध में उन्होंने तत्काल भोपाल कलेक्टर, पशुपालन मंत्री और मुख्यमंत्री से रोक लगाने का आग्रह भी किया था।
आदेश वापस लेने पर क्या बोली साध्वी प्रज्ञा
देसी सांड की नसबंदी के आदेश विभाग की तरफ से वापस लेने पर सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि मुझे लगता है कि यह आदेश कोई आंतरिक षड्यंत्र है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। देसी गौवंश को नष्ट नहीं किया जा सकता। सांसद ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मामले की जांच कराने की मांग करेंगी।
कांग्रेस ने कसा तंज
इधर, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने ट्वीट करते हुए लिखा की – यह हो क्या रहा है, सरकार चल रही हे या सर्कस? राेज सुबह अजीबोगरीब आदेश निकलते है और शाम होते तक निरस्त? पहले मदिरा की खपत बढ़ाने का आदेश निकला,कांग्रेस के विरोध के बाद निरस्त। और अब सांडो के नसबंदी का आदेश भी कांग्रेस के विरोध के बाद निरस्त। ब्यूरोक्रेसी इसीलिए निशाने पर है।




