शहर के पार्कों में सालाना होते हैं 6 करोड़ खर्च, लेकिन हरयाली गायब, लगे हुए है टूटे-फूटे झूले, शिकायतों के बाद भी नहीं कोई कार्रवाई

भोपाल/निशा चौकसे:- शहर में नगर निगम के 80% पार्क बदहाल है. इनमें बच्चों को खेल उपकरण नहीं मिलते हैं, तो बुजुर्गों को बैठने के लिए कुर्सियां, पाथ-वे भी नहीं बचे हैं. कई जगह सड़कों पर कब्जे हो गए हैं, तो कई जगह रसूखदारों के इशारे पर यह खुलते और बंद होते हैं. नगर निगम इनके रखरखाव के लिए 6 करोड का बजट तय करती है, जो खर्च भी हो रहा है उद्यानिकी शाखा द्वारा मुख्य मार्गों पर बने सेंटर वर्ज और चौराहों पर हरी घास और पेड़ पौधे लगाए गए हैं. सालाना छह करोड़ से पार्क विकास, बच्चों के झूले, पानी के इंतज़ाम, सिविल वर्क, रंग-रोगन काम किया जाता है. उद्यानिकी शाखा में 200 कर्मचारियों का अमला है, कमला पार्क, यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क, करिश्मा पार्क, वर्धमान पार्क, नंदन कानन समेत अन्य में झूले, फिसलपट्टी टुटे फूटे पड़े हैं और फाउंटेन बंद हैं. कई जगह पर झूले लगाए गए हैं तो वहां हरयाली गायब है.
नगर निगम की उद्यान शाखा द्वारा पार्कों के रखरखाब के लिए उपकरणों की खरीदी में भी गोलमाल की आशंका जताई जा रही है. दरअसल, जो उपकरण भोपाल या पास के शहरों में 20 हजार रुपए में मिल जाते हैं उसकी खरीदी नागपुर की कंपनी से लगभग दोगुना कीमत में की गई है. नगर निगम प्रशासन के पास इस मामले में शिकायत भी हुई थी. लेकिन अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की. गौरतलब है कि शहर में नगर निगम के पार्कों समेत अन्य एजेंसियों के 1500 पार्क हैं. इनमे से 1100 बेहद ख़राब स्थिति में हैं.




