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 सिहोरा  :  देखें  video काले कानून के विरोध में किसानों का एनएच-30 पर पैदल मार्च, केंद्र  सरकार के खिलाफ नारेबाजी   

 सिहोरा  :  देखें  video काले कानून के विरोध में किसानों का एनएच-30 पर पैदल मार्च, केंद्र  सरकार के खिलाफ नारेबाजी   

  •    भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले पहरेवा नाला में धरना प्रदर्शन 
  •    राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन 

       देखें  video  https://youtu.be/bxXhFPTRRjg

 द लोकनीति डेस्क सिहोरा    
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध का असर शनिवार को मध्यप्रदेश में भी देखने को मिला। जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने पहरेवा नाका में धरना प्रदर्शन किया। धरना प्रदर्शन के बाद किसानों ने करीब ढाई किलो मीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर किसान मार्च निकाला। किसान मार्च के दौरान किसानों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तीन कृषि कानून किसी भी हालत में वापस करने की मांग की। किसान मार्च सिहोरा बस स्टैंड में राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद समाप्त हुआ। यहां किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी की कील वाली तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर तंज कसा और जमकर नारेबाजी की। किसानों ने कहा मोदी सरकार किसान के रास्ते में कील बिछा चुकी है किसान यूनियन के नेताओं ने कहा जब जब राजा डरता है किलेबंदी करता है मजदूर और किसानों की लडाई निरतंर चलती  रहेगी। 


     भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सिहोरा मझौली सहित आसपास के गांवों के सैकडों किसान एनएच- 30 पहरेवा नाका में इकटृठे हुए। हाथों में केंद्र सरकार के तीन काले कानून वापस लेने के बैनर लेकर जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि केंद्र सरकार के इस काले कानून के विरोध में लाखों की संख्या में किसान दिल्ली में पिछले 73 दिनों से धरना दे रहे हैं,  लेकिन सरकार के कांनों में जूं तक नहीं रेंग रही । सरकार चंद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह कानून लेकर आई है, जब तक सरकार इस काले कानून को वापस नहीं लेती किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा । किसान अपनी आखिरी सांस तक इस काले कानून को वापस लेने की लडाई लडता रहेगा । 
 एनएच 30 पर ढाई किलोमीटर का किसान मार्च 
 धरना प्रदशर्न के बाद किसानों ने पहरेवा नाका से किसान मार्च निकाला। मार्च के दौरान किसान ने मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी  काम हमारा दाम तुम्हारा नहीं चलेगा  अंबानी अडानी का दलाल नहीं चलेगा काला कानून वापस लेना होगा जैसे नारे लगाते चल रहे थे। किसान मार्च पहरेवा नाका एनए-30 से खितौला रोड होते हुए नया बस स्टैंड पहुंचा। जहां सैकडों की संख्या में किसानों ने संकल्प लिया कि अब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सांसद और विधायकों के धरों में धरना प्रदर्शन कर उन्हें चूडियां भेंट करेंगे।   


 प्रधानमंत्री  मोदी की कील वाली तस्वीर पर फूल अर्पित कर कसा तंज  
  बस स्टैंड में विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने सरकार अब मानवाधिकार का हनन कर रही है। तानाशाही इतनी हावी है कि कभी दिल्ली में बैठे किसानों के धरना स्थल की बिजली काट दी जाती है पानी काट दिया जाता है। धरना स्थल के आगे के रास्तों पर लोहे की कील और दीवारें खडी कर दी जाती है। क्या किसान सरकार के दुश्मन हैं इतनी गहरी खाई क्यों बना रही है सरकार। यह हमारी ही चुनी गई सरकार है । पहले बिल वापसी फिर घर वापसी होगी।  किसानों ने कहा मोदी सरकार किसान के रास्ते में कील बिछा चुकी है किसान यूनियन के नेताओं ने कहा जब जब राजा डरता है किलेबंदी करता है मजदूर और किसानों की लडाई निरतंर चलती  रहेगी।


तीन कृषि कानून वापस हो, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाया जाए
धरना प्रदर्शन और पैदल मार्च के बस स्टैंड में समापन के बाद एसडीएम सिहोरा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए किसान नेताओं ने दिल्ली बॉर्डर में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए तीन कृषि कानून वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाए जाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही स्थानीय समस्याओं जिसमें वर्ष 2021 में रवि फसल गेहूं का पंजीयन तो सरकार ने शुरू कर दिया है लेकिन समितियां ब्लैक लिस्टेड होने से किसानों के पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं। पिछले वर्ष धान गेहूं का भुगतान शेष है,उसे पूर्ण कराया जाए। इसके अलावा कृषि कार्य के लिए विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित हो ताकि किसानों को किसी तरीके की परेशानी न हो। धरना प्रदर्शन  एवं ज्ञापन के समय  भारतीय किसान यूनियन  के जिलाध्यक्ष  रमेश पटेल,  संभागीय अध्यक्ष संतोष राय, अनिल पटेल, विनय पटेल, ओम प्रकाश पटेल, वीरेंद्र, कौशल, मनोज ,सुरेंद्र ,उदय पटेल, सुनील जैन, अखिलेश, शारदा, दीवान जीतेंद्र ,मनोज , लक्ष्मी प्रसाद, देवेंद्र पटेल ,अरविंद  ,हरिओम , रणजीत , सुरेंन्द्र , अवसर  पटेल , संजय ,विनीत, आशीष शील ,राजू पटैल  के साथ सेकड़ो की संख्या में किसान शामिल थे।   

 
 

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