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कोरोना का कहरः हथकरघा व दस्तकारी से जुड़े कारीगर तंगहाली में

कोरोना का कहरः हथकरघा व दस्तकारी से जुड़े कारीगर तंगहाली में

सीधी/ गौरव सिंह:-  सरकार चाहे जो दावा करे लेकिन हकीकत ये है कि कोरोना काल में कामगार बेरोजगार हैं। तंगहाली में जीवन बसर करने को मजबूर हैं। करघे महीनों से बंद हैं। काम चल नहीं रहा तो पैसे कहां से आएं। ऐसे में ये किसी तरह घिसट-घिसट कर जीने को मजबूर हैं। कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलने से इनकी दुश्वारियां दिन-ब-दिन बढती ही जा रही हैं।बुनकर बताते हैं कि उनके हाथ से बने हुए कपड़ों की मांग कभी इतनी थी कि वे दिन-रात काम करते थे। हाथ से बने कुर्ता, पायजामा, शर्ट, रूमाल, गमछा, दरी की सालभर मांग रहती थी। लेकिन इस साल बहुत बुरा हाल है। कोई काम ही नहीं है। कहीं से कोई मांग न होने के चलते करघे बंद पड़े हैं। ऐसे में आर्थिक विपन्नता स्वाभाविक है।
तीन महीने तक मास्क बना कर किया गुजर बसर
बता दें कि हथकरघा व दस्तकारी समिति भरतपुर (सीधी) के कपड़ों की पहचान देश ही नहीं विदेश तक है। वर्षों से सैकड़ों की तादाद में महिला-पुरुष अपने हाथों की कारीगरी दिखा रहे हैं। इसी से इनका जीवन यापन भी हो रहा है। तत्कालीन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल भी उनके बुने हुए कपड़ों की सराहना कर चुकी हैं। समिति में 150 प्रशिक्षित महिला व पुरुष बुनकर हैं। यहां का वार्षिक टर्नओवर वर्ष 2018-19 में 49 लाख रुपये रहा है। वहीं 2019-20 में करीब तीस लाख रुपये बताया जा रहा है। वर्ष 2005 में जब इसकी शुरुआत की गई तब से यह समिति लगातार नए-नए मुकाम हासिल करती रही है। भारत के कोने-कोने में यहां के कपड़े बेचे जाते रहे हैं। इन कपड़ों की रंगाई इतनी बेहतरीन होती है कि कई वर्षों तक ये चमकदार बने रहते हैं। लेकिन अब बताया जा रहा है कि समिति की बैंक क्रेडिट लिमिट पार हो चुकी है। बुनकरों को ट्रायफेड से नियमित रूप से कच्चे माल की पूर्ति नहीं हो पा रही है जिससे बुनकर परेशान हैं। कोरोना काल में बुनकरों ने तीन माह तक मास्क बनाकर अपनी जीविका चलाई।
समिति के सदस्य सीधी के अलावा रीवा, भोपाल समेत दिल्ली, उत्तर प्रदेश के आगरा, कानपुर और बिहार के पटना और सभी प्रदेशों की राजधानी में आयोजित हस्तकरघा मेले में अपने स्टॉल लगाते हैं। वर्ष 2007 में इनके बनाए गए कपड़े अमेरिका गए थे। एक फरवरी 2019 को तत्कालीन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भरतपुर के हथकरघा व दस्तकारी समिति पहुंचकर यहां के बुनकरों से बात की थी। उन्होंने बुनकरों के कपड़ों की सराहना कर प्रोत्साहित किया था।
भरतपुर में हथकरघा व दस्तकारी समिति द्वारा काम किया जा रहा है। लॉकडाउन के कारण थोड़ा परेशानी आई है लेकिन इस दौरान बुनकरों ने मास्क बनाने का काम किया है।”-संजय चौरसिया, जिला प्रबंधक, आजीविका मिशन, सीधी

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