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 सिवनी : पटवारी ने नाप दी निजी भूमि के साथ शासकीय भूमि ,तहसील के पटवारी शुरू से रहे हैं विवादित

पटवारी ने नाप दी निजी भूमि के साथ शासकीय भूमि 

 धनौरा तहसील के हिंगवानी का मामला 

तहसील के पटवारी शुरू से रहे हैं विवादित

 सिवनी से महेंद्र सिंघ नायक की रिपोर्ट : – जिले की धनौरा तहसील अन्तर्गत आने वाले ग्राम हिंगवानी में एक मामला सामने आया है, जहां हल्का पटवारी ने सीमांकन आवेदक की निजी भूमि के साथ साथ उसी से लगी बहुमूल्य जन-उपयोगी शासकीय भूमि को भी सम्मिलित रूप से मापकर किसान को स्वामित्व दे दिया है। इस पर समीपवर्ती किसानों ने आपत्ति दर्ज करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। यदि पटवारी द्वारा किया गया मापन व सीमांकन त्रुटिपूर्ण पाया जाता है तो सम्बंधित पटवारी पर उचित कार्रवाई की मांग शिकायतकर्ता द्वारा की गई है।


    शिकायतकर्ता सुरेश डेहरिया एवं नरेश डेहरिया ने बताया कि ग्राम हिंगवानी में सालीवाड़ा मार्ग के पास उनकी पैतृक कृषि भूमि है, जिसका खसरा क्रमांक 349/1,2,3 है। इस भूमि के निचले हिस्से में शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 351 क्षेत्रफल 1.38 हेक्टेयर घास भूमि स्थित है। जिसका उपयोग सार्वजनिक तौर पर सभी के द्वारा आवागमन व निस्तार के लिए किया जाता है। इस शासकीय भूमि के निचले हिस्से में सीमांकन आवेदक संतोष कुमार पिता भुवन लोधी की खसरा क्रमांक 350 पर क्षेत्रफल 0.42 हेक्टेयर की निजी भूमि है। जिसके मापन व सीमांकन के लिए संतोष द्वारा आवेदन किया गया था। इसके मापन के लिए मौके पर आईं हल्का पटवारी वैशाली यादव द्वारा दिनांक 07/12/2020 को उक्त आवेदक की निजी भूमि का मापन व सीमांकन किया गया। सीमांकन के दौरान हल्का पटवारी वैशाली ने सीमांकन आवेदक संतोष की निजी भूमि खसरा क्रमांक 350 के साथ साथ शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 351 के एक बड़े हिस्से को भी सीमांकन आवेदक संतोष की निजी भूमि में जोड़कर माप दिया है। उक्त भूमि स्वामी ने पटवारी द्वारा निर्धारित सीमा को आधार मानकर जेसीबी मशीन से सम्पूर्ण भूखंड को खोद दिया गया है।

 

इस खुदाई के बाद सीमांकन आवेदक के खसरे 350 के आसपास की सार्वजनिक निस्तारण की शासकीय भूमि लुप्त हो गई है। जिससे समीपवर्ती किसानों का आवागमन अवरुद्ध हो गया है। नरेश डेहरिया ने आगे बताया कि संतोष का परिवार शासकीय भूमि हड़पने में माहिर है। इन्होंने उत्तर दिशा में ऊपर की ओर इसी खसरा 351 की शेष शासकीय भूमि पर भी कब्जा कर रखा है। वहां पर भी अपनी निजी भूमि में शासकीय भूमि को जोड़कर रखा है। उक्ताशय की सूक्ष्म जाँच व उचित कार्रवाई के लिए शिकायतकर्ता सुरेश डेहरिया द्वारा लिखित शिकायती आवेदन तहसीलदार धनौरा को सौंपा गया है।

पटवारी पर लगाये गम्भीर आरोप : –

हल्का 02 की पटवारी वैशाली यादव पर शिकायतकर्ता नरेश डेहरिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पटवारी वैशाली यादव ने जितने भी मापन सीमांकन कार्य किए हैं, सब त्रुटिपूर्ण हैं। इनके द्वारा निज स्वार्थ के चलते संबंधित किसान को मनमानी भूमि माप दी जाती है। यही नहीं शासकीय भूमि पर स्वयं की उपस्थिति में प्रशासनिक रूप से अवैध कब्जे दिलाये जाते हैं। इन्होंने सीमांकन आवेदक संतोष के साथ सांठ-गांठ की है, और निज स्वार्थ के चलते उसकी निजी भूमि में शासकीय भूमि को मिलाकर माप दिया है। इस त्रुटिपूर्ण व उपकृत करने वाले मापन से पटवारी वैशाली यादव ने प्रशासनिक पद का दुरुपयोग करते हुए संतोष को विधिक तौर पर शासकीय भूमि का कब्ज़ा दिया है। इसके अलावा पहले भी शिकायतकर्ता की अन्य कृषि भूमि के सीमावर्ती किसान के सीमांकन के दौरान भी उनकी उपस्थिति बिना ही त्रुटिपूर्ण मापन कर इनकी कृषि भूमि के कुछ हिस्से अन्य किसान को माप दिया था। जिस पर किसानों में वाद विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी।

 


    वर्तमान मापन के कारण शासकीय भूमि का एक बड़ा हिस्सा संतोष की भूमि में सम्मिलित हो जाने से अब सार्वजनिक आवागमन हेतु भूमि नहीं बची है। इस स्थिति में संतोष द्वारा शिकायतकर्ता सुरेश, नरेश को आने जाने व ट्रैक्टर आदि ले जाने से मना कर दिया गया है। यही नहीं खेत में पानी सींचने के लिए बिछाई जा रही 4 इंची पाइपलाइन तक को मना कर दिया है। जबकि इतनी शासकीय भूमि है कि दो ट्रैक्टर एक साथ गुजर सकते हैं। इससे प्रतिदिन अनावश्यक वाद-विवाद निर्मित हो रहा है। जबकि राजस्व नक्शे के अनुसार संतोष की निजी भूमि के दोनों ओर पर्याप्त शासकीय भूमि है। लेकिन हल्का पटवारी वैशाली यादव द्वारा मनमर्जी से उक्त शासकीय भूमि संतोष के हिस्से में मापकर कब्जा दिलाया गया है। बहुमूल्य जन-उपयोगी शासकीय भूमि के ऐसे बन्दरबांट पर राजस्व विभाग और तहसीलदार धनौरा को इस मामले में संज्ञान लेते हुए जांच सुनिश्चित करनी चाहिए व दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई तय की जानी चाहिए।

 धनौरा तहसील में पटवारी हमेशा रहते हैं विवादित : –

सिवनी जिले की धनौरा तहसील आदिवासी बाहुल्य तहसील है, और यहां पर राजस्व विभाग के पटवारी हमेशा लोगों को मूर्ख बनाने का काम करते हैं। पटवारी भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह करते हुए हमेशा ऐसे काम कर जाते हैं जिससे राजस्व विभाग पर  सवाल उठाए जाने लगते हैं। अभी कुछ ही दिन पहले धनौरा तहसील के ही पटवारी चक्रेश भौरजार के द्वारा  बालाघाट के एक युवक और एक  युवती के साथ मिलकर बेरोजगार आदिवासियों को नौकरी का झांसा देकर लगभग 16 लाख की ठगी करने का मामला सामने आया है, जिसमें धनौरा थाने में लिखित शिकायत भी दी गई, पर थाने से कार्रवाई की अभी तक कोई जानकारी नहीं है। वहीं उक्त पटवारी पिछले डेढ़ 2 महीने से अपने हल्के से तहसील से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहने  पर घंसौर एसडीएम कार्यालय से संबंधित पटवारी चक्रेश भौरजार पर  निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसी तरह कुछ वर्ष पहले धनौरा तहसील के ही पटवारी दिनेश पटले के द्वारा तहसीलदार की पद मुद्रा पर स्वयं के हस्ताक्षर करके बीएलओ बदलने के मामले पर घंसौर एसडीएम कार्यालय से की गई जांच में पटवारी दिनेश पटले दोषी सिद्ध हुआ, परंतु दोषी होने के बावजूद उक्त पटवारी पर पिछले 2 वर्षों से चली आ रही कार्यवाही की प्रक्रिया पर अभी तक कोई निर्णय प्रशासन के द्वारा नहीं लिया गया है। जबकि दोषी पटवारी दिनेश पटले सिवनी तहसील पर पदस्थ है और अधिकारियों पर अपनी पक्की पकड़ बनाए रखने के कारण जिला कार्यालय सिवनी से डिप्टी कलेक्टर और अपर कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी पत्रों के बावजूद पटवारी पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। वही धनोरा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष जहानसिंह मर्सकोले की शिकायत पर पिछले माह जबलपुर कमिश्नर ने संज्ञान लेकर  पटवारी पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश पत्र जारी किए लेने के बावजूद  दोषी पटवारी दिनेश पटले पर सिवनी- प्रशासन से कार्रवाई नही  हो पाई है।

राजस्व विभाग पर उठने लगे सवाल : –

    धनौरा तहसील में राजस्व विभाग क्षेत्र के कुछ पटवारियों की वजह से हमेशा सुर्खियों में बना रहता है वहीं दोषी पटवारी दिनेश पटले पर घंसौर एसडीएम कार्यालय से कार्रवाई नहीं करने के पीछे क्या कारण है यह तो बताना मुश्किल लेकिन सहज ही आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि जिला कार्यालय से चार बार लिखित  पत्र और प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय भोपाल के साथ-साथ जबलपुर कमिश्नर के द्वारा कार्रवाई हेतु निर्देशित किए जाने के बावजूद यदि किसी दोषी पटवारी पर कार्रवाही नहीं की जा रही है तो प्रशासन पर सवाल उठने लाजमी है वैसे भी आप इसे क्या समझेंगे?

 इनका कहना है : –

“शिकायतकर्ता नरेश मेरे पास आया था और जानकारी दिया है। पटवारी को जाँच व अतिक्रमण प्रतिवेदन के लिए आदेशित कर देते हैं।”
 सुखमन कुलेश राजस्व निरीक्षक, धनौरा                                                                                                                                                                                                                                     

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